Tuesday, July 21

Opinion

महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव 2025: लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने का समय
Maharashtra, Opinion

महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव 2025: लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने का समय

लेखक: विनायक अशोक लुनिया भारत का लोकतंत्र केवल संसद या विधानसभा तक सीमित नहीं है। इसकी असली ताकत और आत्मा उन संस्थाओं में बसती है जो जनता के सबसे नज़दीक हैं — ग्राम पंचायतें, नगर परिषदें और नगर पंचायतें**।हाल ही में **महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित नगर निकाय चुनावों की अधिसूचना इस लोकतांत्रिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। आने वाली 2 दिसंबर 2025 को राज्य के लगभग 300 नगरीय निकाय फिर से जनता की अदालत में जाएंगे — विश्वास का नया जनादेश पाने के लिए। 🔹 स्थानीय शासन — लोकतंत्र का असली चेहरा स्थानीय निकाय चुनावों में लोकतंत्र अपनी सबसे नज़दीकी अभिव्यक्ति पाता है।जहाँ सांसद और विधायक नीतियाँ बनाते हैं, वहीं नगरसेवक और पार्षद उन्हें धरातल पर अमल में लाते हैं**।सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएँ इन्हीं के निर्णयों पर निर्भर करती हैं। इसलिए,...
पदक और मैचों से आगे — भारत को खेल को “विकास का आधार” मानना होगा, “मनोरंजन” नहीं
Opinion, Sports

पदक और मैचों से आगे — भारत को खेल को “विकास का आधार” मानना होगा, “मनोरंजन” नहीं

दशकों से भारत में खेलों को एक वैकल्पिक क्षेत्र के रूप में देखा गया है — जिसे चाहो तो अपनाओ, वरना जीवन में जरूरी नहीं। लेकिन आज खेल केवल मैदानों तक सीमित नहीं हैं। ये स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, सामाजिक एकता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से सीधे जुड़े हैं।खेलों को राष्ट्रीय विकास के स्तंभ के रूप में मान्यता देना अब केवल खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य हो गया है।अब समय है कि नीति, शासन और समाज मिलकर इस दृष्टिकोण को संस्थागत रूप दें। 🔹 मनोरंजन से राष्ट्र निर्माण तक भारत जैसे विशाल और युवा देश में खेलों को केवल मनोरंजन का साधन नहीं माना जा सकता। खेल अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और धैर्य सिखाते हैं — जो एक मजबूत समाज की नींव हैं।फिर भी, भारत में खेलों को अब भी “ऐच्छिक” समझा जाता है। राष्ट्रीय बजट में इसका हिस्सा नगण्य है, शिक्षा में इसका स्थान सीम...