झारखंड में घटते जंगल और बढ़ती सड़कें: हाथियों की मौत की बढ़ती घटनाएं सरकार और शोधकर्ताओं के लिए चिंता का कारण
रांची, 5 दिसंबर: झारखंड में लगातार घटते जंगल और बढ़ते निर्माण कार्यों का असर हाथियों के आवास पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और Frontiers in Ecology and Evolution में प्रकाशित नए अध्ययन के अनुसार, 2000 से 2023 के बीच झारखंड में कुल 225 हाथियों की मौत हुई, जिनमें से 152 मौतें सीधे मानव गतिविधियों से संबंधित हैं।
मुख्य कारण:अध्ययन में पाया गया कि हाथियों की मौत का प्रमुख कारण असुरक्षित विद्युत अवसंरचना रही, जिससे 67 मौतें हुईं। इसके अलावा सड़कें, रेलवे पटरियां, शहरी विस्तार और खदानें पारंपरिक हाथी गलियारों को बाधित कर रही हैं। मानसून के दौरान जब हाथियों की आवाजाही अधिक होती है और दृश्यता कम होती है, मृत्यु दर और बढ़ जाती है।
वन क्षेत्र में कमी और मानव निर्माण:अध्ययन के अनुसार, झारखंड में पिछले 23 वर्षों में वन क्षेत्र लगभग 6 प्रतिशत घट गया है, जबकि निर्मि...










