Tuesday, July 21

‘मैं’—पटना पुस्तक मेले का आकर्षण बनी 15 करोड़ की अनोखी पुस्तक, लेखक रत्नेश्वर ने बताया ब्रह्मलोक की यात्रा का अनुभव

पटना, 6 दिसंबर 2025
बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में सज गया है 41वां पटना पुस्तक मेला, जो इस बार पाठकों को एक अद्वितीय साहित्यिक अनुभव दे रहा है। मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बनी 15 करोड़ रुपये मूल्य की किताब ‘मैं’, जिसे लेखक रत्नेश्वर ने लिखा है।

ब्राह्मलोक की यात्रा और दिव्य अनुभव

रत्नेश्वर ने एनबीटी ऑनलाइन को बताया कि अपने सवा वर्ष के वन प्रवास के दौरान उन्होंने श्री कृष्ण की दिव्य उपस्थिति में ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने कहा—

“मैंने विश्वास से साक्षात्कार तक, और साक्षात्कार से मणिकार के साथ एकाकार होने तक की यात्रा की। महत् से अंधकार, अंधकार से प्रकाश और प्रकाश से पुनः अंधकार की यात्रा का साक्षी बनकर, ‘मैं’ अपनी शाश्वत यात्रा पर सदैव सजग रहता है।”

लेखक ने बताया कि उन्होंने 21 दिनों तक स्थितप्रज्ञ अवस्था में रहते हुए भौतिक शरीर से विरक्त होकर ब्रह्मलोक की यात्रा की और रासलीला का प्रत्यक्ष साक्षी बने। ग्रंथ की रचना 6–7 सितंबर 2006 के रत्न मुहूर्त में केवल 3 घंटे 24 मिनट में हुई।

कर्मण्य योग, ज्ञान योग और भक्ति योग का अनुभव

‘मैं’ केवल एक किताब नहीं, बल्कि धर्मग्रंथ है। इसमें पाठक को संसार का त्याग, ईश्वर का दर्शन और मणिकार के माध्यम से ‘मैं’ बनने का परम आनंद अनुभव होता है। यह ग्रंथ कर्मण्य योग, ज्ञान योग, ध्यान योग और भक्ति योग की यात्रा का आख्यान प्रस्तुत करता है।

रत्नेश्वर का संघर्ष और लेखकीय सफर

रत्नेश्वर का जन्म 1966 में बिहार के वारसलीगंज में हुआ। मुश्किलों भरे बचपन के बावजूद उन्होंने शिक्षा और लेखन में अपने पैरों को मजबूत किया।

  • दसवीं कक्षा में संपत्ति विवाद के कारण उनके पास मात्र 7 रुपये बचे।
  • बचपन में उन्होंने मां के गहने बेचकर और खेती करके जीविका चलायी।
  • पटना के पाटलिपुत्र स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें ‘कहानी मास्टर’ के नाम से जाना गया।

उन्होंने हिंदी में कई बेस्टसेलर किताबें लिखीं, जैसे ‘जीत का जादू’, जिसका अंग्रेजी संस्करण ‘Magic in You’ के लिए 20,000 प्री-बुकिंग ऑर्डर मिले। उन्होंने टीवी धारावाहिकों के लिए पटकथा लेखन भी किया।

पटना पुस्तक मेले में ‘मैं’

पुस्तक मेले में ‘मैं’ को हिंदी और अंग्रेजी में प्रदर्शित किया जा रहा है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बावजूद आगंतुकों को किताब के साथ सेल्फी लेने की अनुमति है। आयोजकों का अनुमान है कि मेले में 6 लाख से अधिक लोग आएंगे।

रत्नेश्वर 7 दिसंबर को दोपहर 3 बजे आगंतुकों के साथ ‘ग्रंथ उदय’ शीर्षक से संवाद सत्र आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ बिक्री के लिए नहीं है क्योंकि इसकी सिर्फ एक प्रति मौजूद है।

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