Tuesday, July 21

तेलंगाना फोन टैपिंग कांड: पूर्व SIB चीफ टी. प्रभाकर राव को सुप्रीम कोर्ट का अल्टीमेटम, शुक्रवार सुबह 11 बजे तक करें सरेंडर

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के बहुचर्चित फोन टैपिंग मामले में बड़ा आदेश जारी करते हुए विशेष खुफिया ब्यूरो (SIB) के पूर्व चीफ टी. प्रभाकर राव को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह आदेश आगे की जांच को सुचारू रूप से पूरा करने के उद्देश्य से दिया है।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि राव जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन और जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करेंगे। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि राव को हिरासत के दौरान अपने घर से खाना और नियमित दवाएं लेने की अनुमति होगी।

iCloud डेटा पर सवाल, राज्य सरकार सख्त

सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि जिन iCloud अकाउंट्स के बारे में जानकारी मांगी गई थी, वे खाली पाए गए और दिए गए ईमेल एड्रेस भी खुल नहीं रहे। राज्य सरकार ने बुधवार को आरोप लगाया था कि कोर्ट के आदेश के बावजूद राव जरूरी iCloud जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 29 मई को उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी, यह कहते हुए कि पासपोर्ट मिलने के तीन दिन के भीतर उन्हें भारत लौटना होगा।

हाई कोर्ट की ओर से अग्रिम जमानत खारिज

राव ने अपनी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज किए जाने के बाद तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। इससे पहले 22 मई को हैदराबाद की एक अदालत ने उन्हें “घोषित अपराधी” (Proclaimed Offender) भी घोषित किया था।

मार्च 2024 से कार्रवाई, अधिकारी गिरफ्तार

फोन टैपिंग मामले में हैदराबाद पुलिस अब तक चार पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें SIB के एक निलंबित डीएसपी भी शामिल हैं। इन पर पूर्व बीआरएस शासन में अवैध रूप से फोन टैपिंग, इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिटाने और कई व्यक्तियों की अनधिकृत प्रोफाइल तैयार करने का आरोप है। बाद में इन्हें ज़मानत मिल गई थी।

राजनीतिक मकसद के आरोप

पुलिस का आरोप है कि आरोपी अधिकारियों ने कुछ लोगों के निर्देश पर एक राजनीतिक दल के हित में अवैध निगरानी कराई। इतना ही नहीं, अपने अपराधों के सबूत मिटाने के लिए रिकॉर्ड नष्ट करने की भी साजिश रची गई।

सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा निर्देश इस मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिससे आगामी जांच पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

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