Tuesday, July 21

रीवा में रामकथा के दौरान अंतिम सांस, राम मंदिर आंदोलन के अगुवा डॉ. रामविलास वेदांती का निधन

रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गुढ़वा गांव में जन्मे डॉ. रामविलास दास वेदांती का 15 दिसंबर 2025 को निधन हो गया। वे राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और पूर्व बीजेपी सांसद थे। अपनी जन्मभूमि रीवा में रामकथा के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण उन्होंने वहीं अंतिम सांस ली।

डॉ. वेदांती का जीवन सादगी और भक्ति का प्रतीक रहा। बचपन से ही उन्हें संस्कृत और धार्मिक ग्रंथों में रुचि थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रीवा में पूरी की और फिर संत बनने के लिए अयोध्या का रुख किया। हनुमानगढ़ी के महंत अभिराम दास के शिष्य के रूप में दीक्षा लेने के बाद वे रामकथा और भक्ति के माध्यम से देशभर में प्रसिद्ध हुए।

रीवा से विशेष लगाव

रीवा के लोग उन्हें अपनी मिट्टी का बेटा मानते थे। वे अक्सर अपनी जन्मभूमि लौटते और यहां रामकथा का आयोजन करते। डॉ. वेदांती ने युवाओं को रामभक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। उनकी कथाएं विंध्य की वादियों में गूंजती थीं और हजारों श्रद्धालु उनकी कथाओं को सुनने के लिए इकट्ठा होते थे।

संयोग ही बना अद्भुत मोड़

यहां यह संयोग है कि जहां जन्म हुआ, वहीं जीवन का अंत भी हुआ। रामकथा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और कोहरे के कारण एयर एंबुलेंस उतर नहीं सकी। डॉ. वेदांती ने अपनी अंतिम सांस जन्मभूमि रीवा में ही ली, जो उनके जीवन और धर्मपरायणता का प्रतीक बन गई।

संक्षेप में:

  • डॉ. रामविलास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को रीवा में हुआ था।
  • वे राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता और पूर्व सांसद थे।
  • रीवा में रामकथा के दौरान उनकी मृत्यु हुई।
  • युवाओं को प्रेरित करने और धर्म के संदेश फैलाने में उनका योगदान अमूल्य रहा।

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