Wednesday, July 22

चिनाब नदी में पानी की कमी से पाकिस्तान में हाहाकार सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर आरोप, गेहूं की फसल और खाद्य सुरक्षा पर गहराता संकट

सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख ने पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चिनाब नदी में पानी के बहाव में आई भारी कमी से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कृषि संकट गहराता जा रहा है। हालात इतने गंभीर होते जा रहे हैं कि पानी की कमी के चलते आम लोगों के सामने खाद्य संकट तक का खतरा खड़ा हो सकता है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत पर जल प्रवाह में हेरफेर का आरोप लगाते हुए इस संबंध में औपचारिक पत्र भेजा है। साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने बताया कि भारत से चिनाब नदी के प्रवाह में अचानक आए बदलावों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनका कहना है कि इन बदलावों ने पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है।

पंजाब में गेहूं की फसल पर गहरा असर

पाकिस्तानी अख़बार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने माना है कि स्थिति “बेहद गंभीर और चिंताजनक” हो चुकी है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि भारत जब बिना पूर्व सूचना के बांधों से पानी छोड़ता है, तो नदी का बहाव अचानक तेज हो जाता है, जबकि कई बार दिनों तक पानी रोके रखने से बहाव खतरनाक रूप से घट जाता है।

इस असंतुलन का सीधा असर खेती पर पड़ा है। पंजाब के कई जिलों में किसानों को नहरों से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे गेहूं की फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि नहरों में पानी न होने पर उन्हें मजबूरी में ट्यूबवेल मालिकों से महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ती जा रही है।

खाद्य सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अंद्राबी ने चेतावनी देते हुए कहा कि नदी के बहाव में किसी भी तरह का हस्तक्षेप, खासकर कृषि चक्र के अहम दौर में, पाकिस्तान के लोगों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए सीधा खतरा है। उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात भी कही।

अंद्राबी ने कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत द्वारा एक द्विपक्षीय संधि की अनदेखी पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून तथा अपने दायित्वों के अनुरूप जिम्मेदारी से व्यवहार करने की सलाह देनी चाहिए।

क्यों बढ़ी पाकिस्तान की बेचैनी

विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही आर्थिक बदहाली, महंगाई और कर्ज के बोझ से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए जल संकट हालात को और विस्फोटक बना सकता है। यदि लंबे समय तक सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति बाधित रही, तो गेहूं जैसी प्रमुख फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर आम जनता की थाली पर पड़ेगा।

फिलहाल, सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है और चिनाब नदी का पानी इस कूटनीतिक टकराव के केंद्र में आ गया है।

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