Tuesday, July 21

संसद का शीतकालीन सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नई दिल्ली: संसद का एक दिसंबर से आरंभ हुआ शीतकालीन सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। अठारहवीं लोकसभा के छठे सत्र के दौरान संसदीय कार्यवाही अपेक्षाकृत प्रभावी रही। इस सत्र में लोकसभा की उत्पादकता 111 प्रतिशत और राज्यसभा की उत्पादकता 121 प्रतिशत दर्ज की गई।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के स्थगन से पहले अपने संबोधन में बताया कि शीतकालीन सत्र में कुल 15 बैठकें हुईं, जो 92 घंटे 25 मिनट तक चलीं। इस दौरान सरकार ने 10 विधेयक पेश किए, जिनमें से आठ विधेयकों को लोकसभा की मंजूरी मिली।

प्रमुख विधेयकों को मिली मंजूरी

सत्र के दौरान जिन महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया गया, उनमें ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ प्रमुख रहा, जिसे मनरेगा के स्थान पर लाया गया। इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके अलावा—

  • भारत में नाभिकीय ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े विधेयक
  • ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025’
  • वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगें और विनियोग विधेयक
  • 71 अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने वाला ‘निरसन और संशोधन विधेयक, 2025’
  • पान मसाला पर उपकर से संबंधित ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’

को भी लोकसभा ने मंजूरी दी।

कुछ विधेयक समितियों को भेजे गए

लोकसभा ने ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया। वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक, 2025 पेश कर इसे संसदीय स्थायी समिति के हवाले किया।

वंदे मातरम् और चुनाव सुधारों पर विशेष चर्चा

सत्र के दौरान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर 11 घंटे 32 मिनट तक विशेष चर्चा हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 65 सांसदों ने भाग लिया।
इसके अलावा, चुनाव सुधारों पर 13 घंटे की चर्चा हुई, जिसमें 63 सांसदों ने अपनी बात रखी।

प्रश्नकाल और शून्यकाल में सक्रियता

लोकसभा अध्यक्ष के अनुसार—

  • शून्यकाल में 408 लोक महत्व के मुद्दे उठाए गए
  • नियम 377 के तहत 372 विषय लिए गए
  • 300 तारांकित प्रश्न पूछे गए
  • 3449 अतारांकित प्रश्नों को सूचीबद्ध किया गया

राज्यसभा की कार्यवाही पर सभापति की टिप्पणी

राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से पहले सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी सदस्यों के व्यवहार पर आपत्ति जताई और कहा कि सदन में व्यवधान संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आत्ममंथन का आग्रह भी किया।

सभापति ने बताया कि राज्यसभा का 269वां सत्र अत्यंत उत्पादक रहा और लगभग 92 घंटे की बैठकों में 121 प्रतिशत उत्पादकता दर्ज की गई। उन्होंने इसे संसदीय लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण बताया।

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