Tuesday, July 21

बांग्लादेश में हिंसा पर चीन की दो-टूक: तय समय पर चुनाव हों, स्थिरता से समझौता नहीं

बांग्लादेश में लगातार भड़क रही हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता पर अब चीन ने खुलकर अपनी चिंता जाहिर कर दी है। युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देशभर में फैल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच चीन ने मोहम्मद यूनुस सरकार को साफ और कड़ा संदेश दिया है—चुनाव तय समय पर होने चाहिए और देश में स्थिरता बनाए रखना प्राथमिक जिम्मेदारी है।

चीन का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब बांग्लादेश में फरवरी में प्रस्तावित आम चुनाव को लेकर संशय गहराता जा रहा है और चुनाव टाले जाने की आशंकाएं तेज हो गई हैं। बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को संसदीय चुनाव निर्धारित हैं।

बीजिंग का स्पष्ट रुख

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा,

“चीन बांग्लादेश में सुरक्षित, स्थिर और सुचारू संसदीय चुनाव का समर्थन करता है। हम चाहते हैं कि बांग्लादेश के सभी वर्ग राष्ट्रीय एकता और स्थिरता बनाए रखते हुए अहम राजनीतिक एजेंडों को आगे बढ़ाएं।”

राजनयिक हलकों में इस बयान को मोहम्मद यूनुस सरकार के लिए स्पष्ट चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर इसलिए, क्योंकि यूनुस प्रशासन पर पहले भी चुनाव को लेकर टालमटोल का आरोप लग चुका है।

हिंसा और चुनाव टालने की आशंका

शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में जिस तरह से आगजनी, दंगे और हिंसक प्रदर्शन बढ़े हैं, उसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस अराजकता का इस्तेमाल चुनाव को टालने के बहाने के तौर पर किया जा सकता है।

खालिदा जिया सरकार में वाणिज्य मंत्री रह चुके आमिर खसरू महमूद चौधरी ने भी यूनुस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि भीड़ की हिंसा को “राजनीतिक औजार” बनाकर चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश हो रही है।

बीएनपी का सख्त रुख

बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीएनपी ने भी चुनाव टालने के किसी भी कदम का विरोध किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि देश की जनता फरवरी के चुनाव का इंतजार कर रही है। उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं और चुनावी तैयारियां जोरों पर हैं। बीएनपी ने साफ कहा है कि लोकतंत्र के नाम पर किसी भी देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बीजिंग-ढाका संबंध और चीन की चिंता

चीन की यह चिंता सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है। बीते कुछ वर्षों में बीजिंग-ढाका संबंध काफी मजबूत हुए हैं। चीन बांग्लादेश का बड़ा आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बन चुका है। मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद चीन ने न सिर्फ आर्थिक निवेश बढ़ाया है, बल्कि सैन्य सहयोग भी मजबूत किया है।

ऐसे में बांग्लादेश में अस्थिरता और चुनाव में देरी चीन के हितों के लिए भी खतरा मानी जा रही है।

निष्कर्ष

चीन का यह बयान बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के लिए साफ संदेश है—हिंसा पर काबू पाना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समय पर पूरा करना ही एकमात्र रास्ता है। अगर हालात नहीं संभाले गए, तो बांग्लादेश न सिर्फ आंतरिक संकट में फंसेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ेगा।

 

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