Tuesday, July 21

भारत को जल्द मिलेगा ओमान का जगुआर फाइटर जेट, वायुसेना के लिए अहम साबित होगा

 

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना को जल्द ही ओमान से पूर्व उपयोग में रहे जगुआर फाइटर जेट मिलने वाले हैं। द वॉर जोन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और ओमान के बीच हुए समझौते के तहत इन विमानों के उपकरण और पुर्जों का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना के पुराने जगुआर विमानों को अपग्रेड करने में किया जाएगा।

 

ये जेट विमान सीधे भारत में शामिल नहीं होंगे, बल्कि ओमान में तोड़कर उनके पुर्जों का उपयोग भारतीय जगुआर स्क्वाड्रनों के संचालन और मरम्मत में किया जाएगा। भारत ने पहले भी फ्रांस से पुराने जगुआर विमानों और पुर्जे हासिल किए थे।

 

जगुआर विमान की खासियत और अपग्रेड:

 

1980 के दशक में शुरू हुए DARIN आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत तीन चरणों में जगुआर विमानों को उन्नत किया गया।

डारिन I और डारिन II ने नेविगेशन, हेड-अप डिस्प्ले, हथियार-लक्ष्यीकरण कंप्यूटर और मिसाइल सिस्टम में महत्वपूर्ण सुधार किए।

1999 के कारगिल युद्ध में जगुआर विमानों ने लेजर-गाइडेड बमों के साथ प्रभावी भूमिका निभाई।

2008 में डारिन III में AESA रडार (Elta EL/M-2052) और ग्लास कॉकपिट जैसी उन्नत तकनीक शामिल हुई।

समुद्री हमलों के लिए भी जगुआर विमानों को विशेष रूप से तैयार किया गया है, जिसमें सी-ईगल और हार्पून मिसाइल सिस्टम शामिल हैं।

डिजिटल हेड-अप डिस्प्ले, EFIS और मल्टीफंक्शन डिस्प्ले जैसी सुविधाओं से यह विमान चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बन गया।

 

वायुसेना की जरूरतें और रणनीति:

 

पाकिस्तान और चीन से द्विगुणित खतरे के मद्देनजर भारतीय वायुसेना को कम से कम 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 29 स्क्वाड्रन उपलब्ध हैं।

पुराने मिग-21 फिशबेड विमानों को सेवानिवृत्त करने से स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

हाल ही में भारत ने 36 डसॉल्ट राफेल विमानों की खरीद पूरी की है, जबकि 114 और लड़ाकू विमानों की आवश्यकता की घोषणा की गई है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, ओमान से मिलने वाले ये पुराने जगुआर विमान और उनके पुर्जे भारतीय वायुसेना के मौजूदा बेड़े की विश्वसनीयता और लड़ाकू क्षमता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।

 

 

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