Wednesday, July 22

महाराजा बिजली पासी: 12वीं सदी के वीर राजा, दलित गौरव के प्रतीक को देश कर रहा नमन

 

 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश और देश आज बहुजन नायक, दलित गौरव और वीर योद्धा महाराजा बिजली पासी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। 12वीं सदी के इस महान शासक ने अवध क्षेत्र में स्वतंत्र शासन स्थापित किया और पासी समुदाय सहित समूचे दलित समाज के लिए गौरव का इतिहास रचा। हर वर्ष 25 दिसंबर को उनकी जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।

 

अवध में स्वतंत्र शासन

इतिहासकारों के अनुसार, महाराजा बिजली पासी 1148 से 1184 तक बिजनौरगढ़ (अवध) पर शासन करते थे। उन्होंने किसी भी बड़े शासक की अधीनता स्वीकार नहीं की और स्वतंत्र रूप से अपने राज्य का विस्तार किया।

 

माता-पिता की स्मृति में किलों की स्थापना

अपने पिता नथावन देव और माता बिजना की स्मृति में उन्होंने क्रमशः बिजनागढ़ और नथवागढ़ का निर्माण कराया। कुल 12 किलों का निर्माण कर उन्होंने अपने राज्य की सैन्य मजबूती और प्रशासनिक शक्ति का प्रतीक स्थापित किया।

 

जयचंद को दो बार हराया

महाराजा बिजली पासी की वीरता का प्रमाण कन्नौज के शक्तिशाली राजा जयचंद के साथ हुए युद्ध हैं। उन्होंने जयचंद की सेना को दो बार पराजित किया और अपनी स्वतंत्रता एवं स्वाभिमान को कभी समझौता नहीं होने दिया। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1194 में गांजर के युद्ध में उन्होंने वीरगति प्राप्त की।

 

दलित गौरव और सामाजिक प्रतीक

महाराजा बिजली पासी का महत्व केवल एक शासक या योद्धा के रूप में नहीं, बल्कि दलित समाज के गौरव और आत्म-सम्मान के प्रतीक के रूप में भी है। उनके जीवन और संघर्ष से दलित समाज को यह संदेश मिलता है कि इतिहास में उनके पूर्वजों ने शासन किया, युद्ध जीते और स्वतंत्र सत्ता स्थापित की।

 

सरकार और समाज से सम्मान

भारत सरकार ने वर्ष 2000 में महाराजा बिजली पासी के सम्मान में डाक टिकट जारी किया। यूपी सरकार ने 27 अगस्त 2024 को निहालगढ़ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर महाराजा बिजली पासी रेलवे स्टेशन कर दिया। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी उन्हें जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

जयंती का महत्व

हर वर्ष 25 दिसंबर को महाराजा बिजली पासी की जयंती के अवसर पर पासी समाज और उनके अनुयायी उनके किलों और ऐतिहासिक स्थलों पर एकत्र होते हैं। विभिन्न सांस्कृतिक और शौर्य कार्यक्रमों के माध्यम से उनके शासन, वीरता और सामाजिक योगदान को याद किया जाता है।

 

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