Tuesday, July 21

₹18,000 सालाना ‘पेनल्टी’ का जाल: महंगे कर्ज से पहले निवेश, क्या आप भी फंसे हैं इस चक्रव्यूह में?

 

नई दिल्ली — निवेश की दौड़ में शामिल होने से पहले अगर आपने अपने महंगे कर्ज की अनदेखी कर दी है, तो यह आपकी सबसे बड़ी वित्तीय भूल साबित हो सकती है। चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन कौशिक ने साफ चेतावनी दी है कि 16–18% ब्याज वाले NBFC लोन आपकी दौलत बढ़ाने नहीं, बल्कि उसे चुपचाप खत्म करने का काम करते हैं।

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई पोस्ट में सीए कौशिक ने कहा कि वित्तीय आजादी की शुरुआत म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार से नहीं, बल्कि गलत किस्म के कर्ज को खत्म करने से होती है। खासकर वे लोन, जिन पर ब्याज दर आपकी संभावित निवेश कमाई से ज्यादा हो।

 

निवेश से पहले कर्ज क्यों जरूरी?

 

सीए कौशिक के मुताबिक, ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि वे निवेश से अच्छा रिटर्न कमा लेंगे और EMI भी चुकाते रहेंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि

 

लंबी अवधि में म्यूचुअल फंड या इंडेक्स फंड से औसतन 12–13% रिटर्न मिलता है,

जबकि NBFC लोन पर 16–18% ब्याज देना पड़ता है।

 

ऐसे में आप असल में पैसा बना नहीं रहे, बल्कि हर साल नुकसान उठा रहे होते हैं।

 

₹1 लाख के कर्ज की असली कीमत

 

सीए कौशिक ने उदाहरण देकर समझाया—

 

“अगर आपने ₹1 लाख का लोन 18% ब्याज पर लिया है, तो हर साल सिर्फ ब्याज के रूप में करीब ₹18,000 चुकाने पड़ते हैं। यह ‘लीवरेज’ नहीं, बल्कि आपकी कमाई में ‘लीकेज’ है।”

 

यानी, यह रकम किसी निवेश में नहीं, बल्कि सीधे आपकी जेब से बाहर जा रही है।

 

मानसिक शांति भी होती है गिरवी

 

कौशिक ने कर्ज के भावनात्मक असर पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि लगातार EMI का बोझ इंसान की सोच को सीमित कर देता है।

लोग लंबी अवधि की योजना बनाना छोड़ देते हैं, कई बार बैंक बैलेंस देखना तक बंद कर देते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि महीने की शुरुआत में ही पैसे कट जाएंगे।

 

NBFC कर्ज साफ कर रहे, आप कब?

 

सीए कौशिक ने वित्तीय सिस्टम की ओर इशारा करते हुए बताया कि कई NBFC पिछले कुछ तिमाहियों में हजारों करोड़ रुपये के खराब लोन बट्टे खाते में डाल चुके हैं।

उन्होंने तीखा सवाल उठाया—

“जब कंपनियां अपनी बैलेंस शीट साफ कर रही हैं, तो क्या आप अपना कर्ज साफ कर रहे हैं?”

 

EMI खत्म करना = गारंटीड रिटर्न

 

नितिन कौशिक का मानना है कि

 

18% ब्याज वाला कर्ज चुकाना,

18% टैक्स-फ्री गारंटीड रिटर्न कमाने जैसा है।

 

जब यह महंगा कर्ज खत्म हो जाता है, तो वही EMI की रकम आप इक्विटी, रियल एस्टेट या दूसरे लंबी अवधि के लक्ष्यों में लगा सकते हैं।

 

निष्कर्ष

 

सीए कौशिक के शब्दों में—

 

“असली दौलत अगली मल्टीबैगर खोजने से नहीं बनती। यह उस चीज को काटने से बनती है, जो चुपचाप आपकी ग्रोथ को खत्म कर रही है।”

 

सवाल सिर्फ इतना है—

क्या आप हर साल ₹18,000 की इस ‘पेनल्टी’ के लिए तैयार हैं, या आज ही महंगे कर्ज से बाहर निकलने का फैसला करेंगे?

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