Tuesday, July 21

शी जिनपिंग का ‘एकीकरण’ संदेश: क्या ताइवान के बहाने चीन भारत को भी चुनौती दे रहा है?

 

 

नई दिल्ली: नए साल के मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्र के नाम संदेश जारी किया। इस संदेश में उन्होंने “मातृभूमि का एकीकरण अवश्य होगा” जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार चीन की विस्तारवादी नीति और संभावित खतरों की तरफ इशारा मान रहे हैं।

 

जिनपिंग का यह संदेश उस समय आया जब चीन ने ताइवान के निकट सैन्य अभ्यास (लाइवफायर ड्रिल) पूरी की। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ ताइवान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारत के अरुणाचल प्रदेश पर भी चीन की नजर होने का संकेत मिल रहा है।

 

अरुणाचल पर चीन की नापाक नजरें

चीन अरुणाचल प्रदेश को अपने नक्शों में ‘दक्षिण तिब्बत’ या ‘जंगनम’ के रूप में दर्शाता है। यह क्षेत्र कभी भी तिब्बत का हिस्सा नहीं रहा है और भारत इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। चीन आए दिन अरुणाचल के अलग-अलग इलाकों के नाम बदलता है और अपने प्रशासनिक नियंत्रण का दावा करता है।

 

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने स्पष्ट किया कि भारत और अरुणाचल की सीमाएं तिब्बत से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, “1950 में चीन ने तिब्बत पर जबरदस्ती कब्जा किया, लेकिन अरुणाचल भारतीय क्षेत्र है और इसे हमेशा भारतीय अभिन्न हिस्सा माना जाएगा।” अरुणाचल की तिब्बत के साथ सीमा करीब 1200 किलोमीटर लंबी है, जबकि भूटान के साथ करीब 150 किलोमीटर और म्यांमार के साथ लगभग 550 किलोमीटर है।

 

अमेरिकी रिपोर्ट ने भी चेताया

हाल ही में अमेरिकी रिपोर्ट में चीन की अरुणाचल प्रदेश में बढ़ती दिलचस्पी की ओर भी ध्यान दिलाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच यह मुद्दा भविष्य में बड़े टकराव का कारण बन सकता है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह अरुणाचल प्रदेश को भारतीय क्षेत्र मानता है और चीन की संभावित दावेदारी का विरोध करता है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि शी जिनपिंग का यह संदेश केवल ताइवान तक सीमित नहीं है। इसके शब्दों में छिपा अहंकार और विस्तारवादी सोच भारत के लिए सुरक्षा संबंधी गंभीर संकेत पेश करती है।

 

 

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