Tuesday, July 21

सुप्रीम कोर्ट में बुजुर्ग, दिव्यांग और बीपीएल कार्डधारकों को मिलेगी प्राथमिकता

 

नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अब जरूरतमंद और वरिष्ठ नागरिकों के मामलों की सुनवाई में प्राथमिकता देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस नए नियम के तहत चार श्रेणियों के मामलों को प्राथमिकता दी जाने की घोषणा की है।

 

कौन-कौन शामिल हैं?

 

80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक

दिव्यांग और एसिड हमले के पीड़ित

गरीबी रेखा से नीचे (BPL) रहने वाले लोग

मुफ्त वकील सहायता प्राप्त करने वाले पक्षकार

 

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने वकीलों और पक्षकारों से अनुरोध किया है कि वे दायर की जाने वाली याचिकाओं में स्पष्ट रूप से श्रेणी का उल्लेख करें और उसका सरकारी प्रमाण भी जमा करें। इससे कोर्ट को इन मामलों की सूची को प्राथमिकता देने में आसानी होगी।

 

क्यों थी यह आवश्यकता?

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार और शुक्रवार को लगभग 800 नए मामलों की सुनवाई होती है। इन भारी संख्या के कारण जरूरतमंदों के मामले अक्सर नीचे दब जाते थे। इस नई व्यवस्था से ऐसे मामलों की सुनवाई तेज होगी और न्याय पाने में समय की बचत होगी।

 

सुप्रीम कोर्ट की उपलब्धियां

2025 में सुप्रीम कोर्ट में 75,280 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 65,403 का निपटारा किया गया। इसमें 42,793 दीवानी और 22,610 आपराधिक मामले शामिल हैं। इसके विपरीत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हर साल दर्ज मामलों की संख्या कम होने के बावजूद केवल 70-80 मामलों की सुनवाई होती है। ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने 200 से अधिक मामलों में से लगभग 50 में ही फैसला सुनाया।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई व्यवस्था न्याय तक पहुंच को और अधिक सहज और प्रभावी बनाएगी, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास सीमित संसाधन हैं।

 

 

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