Tuesday, July 21

जनता गंदा पानी पीकर मरती रही, नेता झूला झूलते रहे कैलाश विजयवर्गीय की ‘ढाल’ बने नीले कुर्ते वाले नेता की सच्चाई आई सामने

स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान बना चुके इंदौर शहर की छवि उस वक्त धूमिल हो गई, जब भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 10 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हो गए। इस गंभीर और संवेदनशील मामले पर सवाल पूछे जाने पर प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का आपा खो देना और एक पत्रकार से यह कहना कि “फोकट की बात मत करो”, जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा साबित हुआ।

 

वीडियो वायरल होने के बाद मंत्री को भले ही माफी मांगनी पड़ी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक और चेहरा सामने आया, जिसने मामले को और भी शर्मनाक बना दिया।

 

 

 

नीले कुर्ते वाला नेता कौन है?

 

वायरल वीडियो में मंत्री का बचाव करते हुए पत्रकार से उलझते नजर आने वाला व्यक्ति बीजेपी पार्षद कमल वाघेला है। खास बात यह है कि कमल वाघेला उसी भागीरथपुरा वार्ड का पार्षद है, जहां दूषित पानी ने लोगों की जान ले ली।

 

जहां जनता पीने के साफ पानी के लिए तड़प रही थी, वहीं उनका जनप्रतिनिधि सत्ता की ढाल बनकर मंत्री को बचाने में जुटा दिखाई दिया।

 

 

 

शिकायत लेकर गए लोगों को धमकाकर भगाया

 

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बीते चार महीनों से इलाके में गंदे पानी की समस्या बनी हुई थी। लोगों ने कई बार पार्षद से शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें धमकाकर भगा दिया गया।

न तो जलापूर्ति सुधारी गई, न ही प्रशासन को समय रहते सचेत किया गया—जिसका नतीजा जानलेवा साबित हुआ।

 

 

 

जब लोग मर रहे थे, तब झूला झूल रहे थे पार्षद

 

मामले को और गंभीर बनाता है एक दूसरा वायरल वीडियो, जिसमें पार्षद कमल वाघेला 30 दिसंबर की शाम पार्क में झूला झूलते नजर आते हैं। यही वह समय था, जब भागीरथपुरा में लोग उल्टी-दस्त और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे।

 

जनता सवाल पूछ रही है—

क्या यही है जनसेवा?

क्या यही है जवाबदेही?

 

 

 

सवाल सिर्फ बयान का नहीं, सिस्टम का है

 

यह मामला केवल एक मंत्री के बयान या एक पार्षद के व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।

 

अब सवाल यह है कि

 

क्या मृतकों को न्याय मिलेगा?

क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?

या फिर यह मामला भी माफी और बयानबाजी में दबा दिया जाएगा?

 

इंदौर की जनता जवाब मांग रही है।

 

 

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