Tuesday, July 21

एमएसपी बढ़ी, सरकार को राहत—किसानों को मायूसी, सिर्फ 15 रुपये बोनस पर 2600 रुपये में होगी गेहूं खरीदी

 

भोपाल। मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन को लेकर मोहन सरकार ने इस वर्ष भी 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस घोषणा से जहां राज्य सरकार को आर्थिक राहत मिली है, वहीं किसानों में इसे लेकर खास उत्साह नजर नहीं आ रहा। कारण यह है कि इस बार किसानों को बोनस के रूप में केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल ही अतिरिक्त मिलेंगे।

 

दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई बढ़ोतरी ने राज्य सरकार का बोझ काफी हद तक कम कर दिया है। पिछले वर्ष गेहूं का एमएसपी 2275 रुपये था, जिस पर राज्य सरकार ने 125 रुपये बोनस जोड़कर 2400 रुपये में खरीदी की थी। बाद में दर बढ़ाकर 2600 रुपये करने से सरकार पर 175 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भार पड़ा था।

 

इस वर्ष केंद्र ने गेहूं का एमएसपी बढ़ाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। ऐसे में राज्य सरकार को 2600 रुपये की दर बनाए रखने के लिए केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल ही बोनस देना होगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को भेज दिया है, जिसे शीघ्र ही कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है।

 

फरवरी से पंजीयन, मार्च से खरीदी

प्रदेश में गेहूं उपार्जन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। फरवरी माह से किसानों का पंजीयन शुरू होगा, जबकि मार्च से खरीदी प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। पिछले साल प्रदेश में करीब 9 लाख किसानों से 77 लाख टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस बार भी अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है।

 

कर्ज में डूबी एजेंसियां ही करेंगी उपार्जन

नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड पर इस समय लगभग 72 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। ब्याज के बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से सीधे खरीदी का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, लेकिन अब तक सहमति नहीं मिल सकी है। ऐसे में इस बार भी पुरानी व्यवस्था के तहत राज्य की एजेंसियां ही गेहूं का उपार्जन करेंगी।

 

कुल मिलाकर, एमएसपी बढ़ने से सरकार को जहां बड़ी राहत मिली है, वहीं किसानों को उम्मीद के मुताबिक बोनस न मिलने से निराशा हाथ लगी है।

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