Tuesday, July 21

मेजर विवेक गुप्ता की वीरता: ‘चिंता मत करो पिताजी…’, कारगिल का महावीर

 

आज 2 जनवरी को कारगिल युद्ध के वीर मेजर विवेक गुप्ता का जन्मदिन है। राजपूताना राइफल्स के इस बहादुर अधिकारी को उनकी अदम्य वीरता और शौर्य के लिए मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

 

सेना की कहानियों में पला एक बच्चा

देहरादून के गुप्ता परिवार में 2 जनवरी 1970 को जन्मे विवेक गुप्ता बचपन से ही सेना और देशभक्ति की कहानियों में पले-बढ़े। पिता कर्नल बीआरएस गुप्ता आर्मी ऑर्डनेंस कोर में अधिकारी थे, जिनसे मिली प्रेरणा ने मेजर विवेक को सेना अधिकारी बनने के लिए प्रेरित किया।

 

सेना में कमीशन और प्रशिक्षण

1992 में उन्होंने राजपूताना राइफल्स में कमीशन लिया। युवा मेजर न केवल एक सख्त सैनिक थे, बल्कि उन्हें बॉडीबिल्डिंग और गाने का भी शौक था। उनकी बटालियन उन्हें उत्साही गायक और प्रेरक नेता के रूप में याद करती है।

 

कारगिल युद्ध और तोलोलिंग टॉप का मिशन

कारगिल युद्ध के दौरान, 13 जून 1999 को मेजर विवेक गुप्ता को तोलोलिंग टॉप पर कब्जा करने का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया। लीडिंग चार्ली कंपनी की कमान संभालते हुए उन्होंने भारी गोलीबारी और तोपखाने की फायरिंग के बीच दुश्मन के किले पर हमला किया।

गंभीर घायल होने के बावजूद मेजर ने हथियार उठाए रखा और दुश्मन के तीन सैनिकों को मार गिराया। उनके अदम्य साहस और नेतृत्व से उनकी कंपनी ने दुश्मन की पोजीशन पर कब्जा किया।

 

अंतिम पत्र और सर्वोच्च बलिदान

युद्ध के मैदान में ही अपने घायल होने के बाद मेजर विवेक गुप्ता ने शहादत पाई। उन्होंने पिता कर्नल बीआरएस गुप्ता को अपना आखिरी पत्र लिखा था, जिसमें कहा था – ‘चिंता मत करो पिताजी, मैं जल्द ही वापस आऊंगा।’ इस पत्र की प्राप्ति उनके अंतिम संस्कार के दो दिन बाद हुई।

 

महावीर चक्र से सम्मान

मेजर विवेक गुप्ता की अदम्य वीरता, प्रेरक नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण ने उन्हें कारगिल युद्ध का सच्चा नायक बना दिया। उनके बलिदान और साहस को याद करते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

 

 

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