Tuesday, July 21

रोहित–विराट के बाद वनडे का भविष्य: खतरे की घंटी, ICC–BCCI को ठोस सुधारों की दरकार

 

एक दौर था जब कहा जा रहा था कि टेस्ट क्रिकेट खत्म हो जाएगा, लेकिन आज संकट वनडे क्रिकेट पर मंडरा रहा है। टी20 की लोकप्रियता और टेस्ट की प्रतिष्ठा के बीच वनडे धीरे-धीरे हाशिये पर जाता दिख रहा है। कोविड काल के बाद से वनडे मैचों और सीरीज़ की संख्या में लगातार गिरावट आई है। पांच मैचों की वनडे सीरीज़ अब इतिहास बनती जा रही है और पूरा फोकस केवल विश्व कप तक सिमट गया है।

 

भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने साफ चेतावनी दी है कि 2027 विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट के लिए अस्तित्व बचाना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उसी समय रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे सुपरस्टार्स के संन्यास लेने की संभावना है। अश्विन के मुताबिक, वनडे की मौजूदा लोकप्रियता काफी हद तक इन्हीं बड़े नामों पर टिकी हुई है।

 

स्टार पावर के सहारे चल रहा वनडे

 

अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ में कहा कि जब रोहित और विराट विजय हजारे ट्रॉफी में खेले, तो एक घरेलू टूर्नामेंट होते हुए भी दर्शकों की भारी दिलचस्पी देखने को मिली। उन्होंने कहा,

“हम मानते हैं कि खेल खिलाड़ी से बड़ा होता है, लेकिन कई बार खेल को जिंदा रखने के लिए बड़े खिलाड़ियों की मौजूदगी जरूरी होती है। सवाल यह है कि जब ये खिलाड़ी वनडे से हट जाएंगे, तब क्या होगा?”

 

ICC को अश्विन की बड़ी सलाह

 

अश्विन ने ICC की मौजूदा नीति पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि लगातार और जरूरत से ज्यादा टूर्नामेंट कराने से वनडे की वैल्यू घट रही है। उन्होंने फीफा मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि

 

केवल वनडे लीग पर फोकस किया जाए

हर चार साल में सिर्फ एक वनडे वर्ल्ड कप हो

बाइलेटरल सीरीज़ और फॉर्मेट्स की भरमार कम की जाए

 

उनके अनुसार, इससे विश्व कप की अहमियत बढ़ेगी और दर्शकों का उत्साह भी लौटेगा।

 

इरफान पठान भी चिंतित

 

पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी वनडे के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सुझाव दिया कि

 

तीन मैचों की जगह पांच मैचों की वनडे सीरीज़ हों

ट्राई सीरीज़ और क्वाड्रेंगुलर सीरीज़ को फिर से शुरू किया जाए

 

इरफान का मानना है कि वनडे में जो भी नई जान आई है, वह रोहित और विराट जैसे दिग्गजों की वजह से ही आई है।

 

निष्कर्ष

 

वनडे क्रिकेट आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। अगर ICC और BCCI ने समय रहते ठोस और दूरदर्शी फैसले नहीं लिए, तो रोहित–विराट के बाद यह फॉर्मेट केवल विश्व कप तक सिमट कर रह सकता है। वनडे को बचाने के लिए संरचना, कैलेंडर और आयोजन शैली—तीनों में बड़े सुधार अब वक्त की मांग बन चुके हैं।

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