Tuesday, July 21

दही-चूड़ा भोज के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी नीतीश सरकार में 10 नए मंत्री तय करेंगे जातीय-सामाजिक संतुलन

 

पटना | बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के बाद बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। परंपरागत दही-चूड़ा भोज के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। वर्तमान में मंत्रिपरिषद में 10 पद रिक्त हैं और इन्हें भरने को लेकर जदयू और भाजपा के बीच फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है।

 

243 सदस्यीय विधानसभा में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 36 हो सकती है। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कुल 26 मंत्री हैं। प्रस्तावित विस्तार में 6 मंत्री जदयू और 4 मंत्री भाजपा के बनाए जाने की संभावना है।

 

वर्कलोड बना विस्तार की बड़ी वजह

 

मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही है क्योंकि कई वरिष्ठ मंत्रियों पर अत्यधिक कार्यभार है।

जदयू के वरिष्ठ नेता बिजेन्द्र प्रसाद यादव के पास वित्त सहित पांच अहम विभाग हैं। लगभग 80 वर्ष की उम्र में इतने विभागों का संचालन चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसी तरह विजय चौधरी के पास चार विभाग हैं, जबकि चार अन्य मंत्री दो-दो विभाग संभाल रहे हैं। ऐसे में विभागों का पुनर्वितरण भी तय माना जा रहा है।

 

 

जदयू कोटे से ये नाम सबसे आगे

 

शीला मंडल (फुलपरास)

 

जदयू विधायक शीला मंडल का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं—

पहला, महिला वोट बैंक नीतीश कुमार की राजनीति का अहम आधार रहा है और जदयू कोटे से फिलहाल केवल एक महिला मंत्री हैं।

दूसरा, शीला मंडल धानुक जाति से आती हैं, जो अति पिछड़ा वर्ग में शामिल है।

तीसरा, वे वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री धनिक लाल मंडल की भतीजी हैं। राजनीतिक विरासत और सामाजिक समीकरण उनके पक्ष में जाते दिख रहे हैं।

 

रत्नेश सदा (सोनबरसा)

 

महादलित मुसहर समुदाय से आने वाले रत्नेश सदा का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। 2023 में जीतन राम मांझी की राजनीतिक काट के तौर पर उन्हें मंत्री बनाया गया था। सोनबरसा सीट पर उनका टिकट बचाने के लिए खुद नीतीश कुमार ने हस्तक्षेप किया था, जिससे उनका कद और मजबूत हुआ है।

भाजपा कोटे से संभावित चेहरे

 

संजय मयूख (विधान परिषद सदस्य)

 

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय मयूख को मंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज है। नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल में कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है।

संजय मयूख अमित शाह और राजनाथ सिंह के करीबी माने जाते हैं। 2023 में नीतीश कुमार का उनके घर छठ पूजा के दौरान पहुंचना राजनीतिक संकेत के रूप में देखा गया था।

 

नीतीश मिश्र (झंझारपुर)

 

भाजपा विधायक नीतीश मिश्र को दूसरा ब्राह्मण चेहरा बनाने की संभावना है। फिलहाल मंगल पांडेय ही एकमात्र ब्राह्मण मंत्री हैं।

मिथिलांचल ने 2025 चुनाव में एनडीए को 37 में से 31 सीटें दी हैं, लेकिन क्षेत्र से मंत्री प्रतिनिधित्व बेहद सीमित है। नीतीश मिश्र पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के पुत्र हैं और पहले भी मंत्री रह चुके हैं।

 

अन्य दावेदारों की लंबी सूची

 

भाजपा से रेणु देवी, तारकिशोर प्रसाद, जनक राम, हरि सहनी, केदार प्रसाद गुप्ता के नाम चर्चा में हैं।

वहीं जदयू से जयंत राज, महेश्वर हजारी, उमेश सिंह कुशवाहा और विजय मंडल को भी मंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है।

 

संतुलन साधने की राजनीति

 

नीतीश मंत्रिमंडल का यह विस्तार केवल खाली पद भरने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसमें महिला, अति पिछड़ा, महादलित, ब्राह्मण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश की जाएगी।

मकर संक्रांति के बाद होने वाला यह विस्तार 2025 विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार की राजनीतिक रणनीति का अहम संकेत माना जा रहा है।

 

 

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