Tuesday, July 21

मजदूर की बेटी बनी BSF अफसर खाकी वर्दी में घर लौटी तो 5 किलोमीटर दूर स्टेशन पर उमड़ा पूरा गांव

 

 

हरदा (मध्य प्रदेश)।

संघर्ष, मेहनत और सपनों की उड़ान की एक मिसाल हरदा जिले के बारजा गांव में देखने को मिली, जब एक मजदूर की बेटी कीर्ति कलम सीमा सुरक्षा बल (BSF) में अफसर बनकर खाकी वर्दी में अपने गांव लौटीं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरे गांव ने ऐसा स्वागत किया, जो वर्षों तक याद रखा जाएगा।

 

स्टेशन पर बिछे पलक-पांवड़े

 

जैसे ही ग्रामीणों को सूचना मिली कि BSF की ट्रेनिंग पूरी कर कीर्ति पहली बार वर्दी में घर लौट रही हैं, वैसे ही गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर टिमरनी रेलवे स्टेशन पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। फूल-मालाएं, जयकारे और गर्व से भरी आंखों के बीच बेटी का स्वागत किया गया। स्टेशन से गांव तक जश्न का माहौल बना रहा।

 

मेहनत की मिसाल हैं कीर्ति

 

कीर्ति कलम ने वर्ष 2018 में 12वीं कक्षा की मेरिट सूची में स्थान बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। अब 2026 में उन्होंने BSF में अफसर बनकर परिवार और गांव का नाम रोशन कर दिया। सिर पर BSF की कैप, वर्दी पर अशोक स्तंभ और चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक—कीर्ति को देखकर हर आंख गर्व से नम हो उठी।

 

पिता की आंखों में गर्व के आंसू

 

कीर्ति के पिता भंवरसिंह कलम मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने खुद पढ़ाई नहीं की, लेकिन बेटी की शिक्षा और सपनों के आगे कभी गरीबी को आड़े नहीं आने दिया। बेटी की सफलता पर उनकी आंखों में गर्व और खुशी के आंसू साफ झलक रहे थे।

 

देश सेवा को चुना लक्ष्य

 

कीर्ति का चयन एक साथ मध्य प्रदेश पुलिस और BSF में हुआ था, लेकिन उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करने का संकल्प लेते हुए BSF को चुना। ट्रेनिंग के बाद उन्हें मेघालय में ड्यूटी सौंपी गई है, जिसके लिए वह बुधवार को रवाना हो चुकी हैं।

 

नेताओं और ग्रामीणों ने किया सम्मान

 

कीर्ति के स्वागत समारोह में भाजपा मंडल अध्यक्ष अतुल बारंगे, उपेंद्र गद्रे, गौरव गद्रे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, नगरवासी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पूर्व विधायक संजय शाह ने भी गांव पहुंचकर कीर्ति को सम्मानित किया और देश सेवा के लिए शुभकामनाएं दीं।

 

ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

 

कीर्ति कलम की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो सीमित संसाधन भी सपनों को रोक नहीं सकते। आज बारजा गांव की यह बेटी पूरे देश की बेटियों के लिए संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी बन चुकी है।

 

 

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