Tuesday, July 21

बाल विवाह रोकने वाली ‘तेजस्विनी’ रेनू पासवान कांस में दिखाएंगी बिहार की ताकत

 

 

मुजफ्फरपुर/कोलकाता: बिहार की बेटी और सामाजिक कार्यकर्ता रेनू पासवान को इस वर्ष मई में होने वाले कांस फिल्म फेस्टिवल में रेड कार्पेट वॉक का विशेष निमंत्रण मिला है। यह पहली बार है जब बिहार से किसी महिला को इस प्रतिष्ठित मंच पर चलने का अवसर प्राप्त हुआ है। विश्वभर के नामी हस्तियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने रेनू पासवान बिहार की सामाजिक पहचान, नारी सशक्तिकरण और बालिकाओं के उत्थान की कहानी प्रस्तुत करेंगी।

 

सशक्त बिहार की मिसाल

रेनू पासवान का कहना है, “यह सिर्फ मेरी उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए गर्व की बात है। कांस का मंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार को पहचान दिलाने का अनूठा अवसर है।” उन्होंने बिहार सरकार से सहयोग की भी अपील की है, ताकि राज्य की सकारात्मक छवि को और मजबूती मिले।

 

संघर्षों से भरा जीवन

रेनू ने महज 14 वर्ष की उम्र में बाल विवाह का विरोध किया और शिक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने मुजफ्फरपुर से शिक्षा पूरी की और बेंगलुरु व पुणे विश्वविद्यालय से स्नातक व पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इंफोसिस में करीब 15 वर्ष तक काम करने के बाद, भाई की मौत के बाद उन्होंने जॉब छोड़ सोशल वर्क को अपना जीवन उद्देश्य बनाया।

 

तेजस्विनी भारत फाउंडेशन और सामाजिक अभियान

2020 में बिहार लौटकर रेनू ने तेजस्विनी भारत फाउंडेशन की स्थापना की। इसके तहत उन्होंने ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण के लिए:

 

1000+ जागरूकता बैठकें

वंचित बच्चों के लिए ओपन स्कूल केंद्र

100+ महिलाओं को उद्यमिता प्रशिक्षण

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से घरेलू हिंसा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और बालिका शिक्षा पर व्यापक जागरूकता अभियान

 

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व

रेनू पासवान संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनका संदेश है कि बिहार को सिर्फ नकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यहां शिक्षित, प्रोफेशनल और सशक्त लोग भी हैं।

 

 

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