Tuesday, July 21

विदेश में पढ़ाई के लिए जरूरी SAT एग्जाम: 2026 में UG एडमिशन के लिए अब डिजिटल फॉर्मेट

 

 

नई दिल्ली: विदेश में पढ़ाई के लिए लाखों भारतीय छात्र हर साल विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम देते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण एग्जाम है SAT (स्कॉलास्टिक असेसमेंट टेस्ट)। यह टेस्ट यह सुनिश्चित करता है कि स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाला छात्र कॉलेज स्तर की पढ़ाई के लिए तैयार है या नहीं।

 

SAT एग्जाम क्या है?

SAT अब पूरी तरह डिजिटल फॉर्मेट में होता है और इसकी अवधि 2 घंटे 14 मिनट है। यह दो सेक्शन में लिया जाता है – रीडिंग और राइटिंग और मैथ्स। कुल स्कोर 400 से 1600 तक होता है। यह टेस्ट छात्रों की उन स्किल्स का मूल्यांकन करता है, जो बैचलर्स की पढ़ाई के लिए जरूरी मानी जाती हैं।

 

SAT की जरूरत क्यों है?

हालांकि कई विदेशी विश्वविद्यालय सीधे बोर्ड के मार्क्स पर एडमिशन देते हैं, फिर भी SAT स्कोर के आधार पर छात्र का आकलन किया जाता है। यह यूनिवर्सिटी को यह तय करने में मदद करता है कि सभी छात्रों को एक समान अवसर मिल रहा है। साथ ही, SAT में अच्छा प्रदर्शन करने पर मेरिट आधारित स्कॉलरशिप हासिल करने का भी मौका बढ़ जाता है।

 

कहाँ-कहाँ मान्यता है SAT की?

पहले SAT केवल अमेरिकी विश्वविद्यालयों में मान्यता प्राप्त था, लेकिन अब इसे 80 से अधिक देशों में स्वीकार किया जाता है। अमेरिका में 4,000 से अधिक कॉलेज और हार्वर्ड, येल, प्रिंसटन, MIT, स्टैनफर्ड जैसे संस्थान SAT स्कोर के आधार पर UG एडमिशन देते हैं। ब्रिटेन में ऑक्सफर्ड, कैम्ब्रिज और इंपीरियल कॉलेज लंदन में भी UG एडमिशन के लिए SAT की जरूरत होती है। इसके अलावा, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के कुछ विश्वविद्यालयों में भी SAT अनिवार्य है।

 

विदेश में 2026 में अंडरग्रेजुएट पढ़ाई का सपना देखने वाले छात्रों के लिए SAT की जानकारी और तैयारी अब पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गई है।

 

 

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