Tuesday, July 21

भारतीय सिर्फ लेते नहीं, देते हैं—ट्रंप के बयान पर बीजेपी नेता महेश जेठमलानी का जवाब

 

भारतीय प्रवासियों के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट पर बीजेपी नेता और सीनियर वकील महेश जेठमलानी ने कड़ा विरोध जताया है। ट्रंप ने एक चार्ट साझा किया था, जिसमें विभिन्न देशों से आए प्रवासियों के अमेरिका में सरकारी सहायता लेने की दरें दिखाई गईं, लेकिन इस सूची में भारत का नाम शामिल नहीं था।

 

जेठमलानी ने कहा कि ट्रंप द्वारा फैलाई जा रही धारणा कि भारतीय “सिर्फ लेने वाले” हैं, पूरी तरह गलत और नस्लवादी है। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारतीय जहां भी रहते हैं, वे जितना लेते हैं उससे कहीं ज्यादा योगदान देते हैं। वे टैक्स भरते हैं, अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करते हैं और अपने कौशल, शिक्षा और मेहनत से समाज को मजबूत बनाते हैं।”

 

अमेरिकी आंकड़े और वैश्विक रुझान

 

महेश जेठमलानी ने बताया कि ट्रंप के चार्ट में जिन देशों का जिक्र था, उनमें बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, चीन, इजरायल/फिलिस्तीन और यूक्रेन शामिल थे, लेकिन भारत का नाम नहीं था। उन्होंने कहा कि यह रुझान अमेरिका के बाहर भी देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, जर्मनी में भारतीय प्रवासी औसत वेतन के मामले में सबसे ऊपर हैं, जो स्थानीय जर्मनों और अन्य प्रवासी समूहों से अधिक है।

 

भारतीय अमेरिकी की आर्थिक स्थिति

 

प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोग आर्थिक रूप से अत्यंत सक्षम हैं। साल 2023 में भारतीय अमेरिकी परिवारों की औसत वार्षिक आय 1,51,200 अमेरिकी डॉलर थी, जबकि कुल एशियाई परिवारों की औसत आय 1,05,600 डॉलर थी। 16 वर्ष और उससे अधिक उम्र के भारतीय अमेरिकियों की औसत व्यक्तिगत आय 85,300 डॉलर रही, जो एशियाई औसत से कहीं अधिक है।

 

जेठमलानी ने कहा, “ये आंकड़े एक वैश्विक सच्चाई को दर्शाते हैं—भारतीय जहां भी रहते हैं, वहां के लिए वरदान साबित होते हैं। ट्रंप का यह बयान न केवल गलत है, बल्कि नस्लवादी सोच को बढ़ावा देता है।”

 

यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब वैश्विक मंच पर भारतीय प्रवासियों की आर्थिक और सामाजिक भूमिका पर चर्चा तेज है और उनके योगदान को नजरअंदाज करने का प्रयास किया जा रहा है।

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