Tuesday, July 21

झारखंड में पेसा नियमावली पर विवाद: IRS निशा उरांव बोलीं – कानून की आत्मा हुई खत्म

 

 

रांची: झारखंड में पेसा नियमावली लागू होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व पंचायती राज निदेशक और आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में जारी नियमावली उनके कार्यकाल में तैयार और विधि विभाग द्वारा अनुमोदित ड्राफ्ट से पूरी तरह अलग है।

 

‘रूढ़िजन्य’ शब्द हटाने पर आपत्ति

 

निशा उरांव के अनुसार, पेसा कानून 1996 और संविधान का मूल आधार आदिवासियों की परंपराओं और रूढ़ियों पर टिका है। उनके समय के ड्राफ्ट में हर जगह ‘रूढ़िजन्य’ शब्द शामिल था, लेकिन नई नियमावली में इसे हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा की शक्तियों में भारी कटौती हुई है और ‘कस्टमरी लॉ’ (रूढ़िजन्य कानून) का उल्लेख न होने से आदिवासियों की पारंपरिक पहचान पर खतरा मंडरा रहा है।

 

प्रभावशाली शक्तियों पर साधा निशाना

 

निशा उरांव ने सवाल उठाया कि ये बदलाव क्यों और किसके इशारे पर किए गए। उनका कहना है कि राज्य में कुछ गैर-रूढ़िजन्य आदिवासी शक्तियों ने नियमावली में बदलाव का दबाव बनाया। उनके निदेशक पद से हटते ही पुराना ड्राफ्ट बदलकर पेसा के मूल भाव को खत्म कर दिया गया।

 

ड्राफ्टिंग प्रक्रिया पर सवाल

 

पूर्व निदेशक ने ड्राफ्टिंग प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जुलाई 2023 में जनता से सुझाव लेने और मार्च 2024 में विधि विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद फिर से नई ड्राफ्ट कमेटी बनाना गलत था। नए ड्राफ्ट में उन परंपराओं की अनदेखी की गई, जो पेसा कानून की बुनियाद हैं।

 

कैबिनेट से नियमावली की मंजूरी

 

निशा उरांव पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव की बेटी भी हैं। दिसंबर 2025 में जब कैबिनेट से पेसा नियमावली को मंजूरी मिली, तो उन्होंने इसे आदिवासी समाज के लिए बड़ी जीत बताया।

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