Wednesday, July 22

अमेरिका की साजिश? 68 अपाचे हेलीकॉप्टर पर डोनाल्ड ट्रंप के बयान से खलबली, नाराज पीएम मोदी ने खुद की थी शिकायत

 

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे नाखुश हैं। इसके अलावा, ट्रंप ने अपाचे हेलीकॉप्टर डील पर हुई देरी को लेकर भी चौंकाने वाला बयान दिया। उनका कहना था कि भारत को जरूरी रक्षा उपकरण प्राप्त करने में कई साल लग गए, जो उनके मुताबिक बिल्कुल अनुचित था।

 

अपाचे हेलीकॉप्टर की देरी पर ट्रंप का बयान

डोनाल्ड ट्रंप ने विशेष रूप से अपाचे हेलीकॉप्टर की खरीद में हुई देरी पर चिंता जताई और कहा कि यह इंतजार पांच साल तक खिंच गया, जो कि भारत जैसे प्रमुख रक्षा साझेदार के लिए अनुचित था। उन्होंने इसे टाली जा सकने वाली देरी बताया और कहा कि मित्र देशों को अपने रक्षा उपकरणों के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, खासकर जब सौदे की मंजूरी पहले ही मिल चुकी हो।

 

क्या अमेरिकी साजिश थी?

ट्रंप के इस बयान ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत को हथियारों की आपूर्ति में देरी के पीछे अमेरिकी साजिश थी। ट्रंप ने खुद को एक बड़े सेल्समैन के रूप में पेश करते हुए यह भी कहा कि वह दुनिया में सबसे ज्यादा बोइंग हेलीकॉप्टर बेचने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि रक्षा उपकरणों की डिलीवरी में देरी से पार्टनरशिप में भरोसा और कुशलता घटती है।

 

पीएम मोदी और अमेरिका के रिश्ते पर खुलासा

ट्रंप ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से इन देरी के बारे में अपनी चिंता जाहिर की थी। उनके अनुसार, उनके मजबूत व्यक्तिगत रिश्तों के कारण ही ये संवेदनशील मुद्दे खुलकर चर्चा में आए। इसके साथ ही, ट्रंप ने भारत पर लगे अमेरिकी टैरिफ का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा कि बाद में अधिकारियों को 39 अरब डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिला, जो पहले की योजना में नहीं था।

 

ट्रंप का दावा

ट्रंप का कहना था कि उनके प्रशासन के दौरान रक्षा सौदों में इस तरह की देरी नहीं होनी चाहिए, और उन्होंने ऐसे मुद्दों पर खुद को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत जैसे देशों को आवश्यक रक्षा उपकरण तुरंत मिलने चाहिए, न कि तीन-चार साल बाद।

 

इस प्रकार, ट्रंप का यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई बहस को जन्म दे सकता है, खासकर जब बात रक्षा सौदों और व्यापारिक मुद्दों पर हो।

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