Tuesday, July 21

वेस्ट यूपी में SIR का सियासी असर, मंत्री-विधायकों पर पड़ेगा सीधा प्रभाव

मेरठ, 7 जनवरी: उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के बाद जारी नई वोटर लिस्ट ने सियासी दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे 2027 के विधानसभा चुनाव में बड़े नेताओं के समीकरण गड़बड़ सकते हैं।

मेरठ जिले में SIR के दौरान कुल 6,65,647 वोटरों के नाम हटाए गए, जिससे वर्तमान में मतदाताओं की संख्या 20,34,185 रह गई है। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से सबसे अधिक 1,54,739 वोट कटे हैं, जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। वहीं, बीजेपी के गढ़ मेरठ कैंट सीट से 1,49,000 वोट और हस्तिनापुर से 64,550 वोट हटे हैं।

संभल और मुजफ्फरनगर की स्थिति:
संभल जिले में कुल 3.18 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी की चंदौसी सीट से 99,093 वोट हटने से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। मुजफ्फरनगर जिले में 3.44 लाख वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिसमें सदर सीट से विधायक कपिल देव अग्रवाल के क्षेत्र से सबसे अधिक 92,460 वोट कटे हैं।

सहारनपुर, बिजनौर और शामली:
सहारनपुर जिले में 4.32 लाख और बिजनौर में 4.27 लाख वोटरों के नाम हटाए गए। सहारनपुर नगर से सबसे अधिक 1,16,049 वोट हटे हैं। शामली जिले की तीनों विधानसभा सीटों में 1,63,465 वोट कटे हैं।

मुस्लिम बहुल क्षेत्र और बीजेपी के गढ़:
मुरादाबाद जिले में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से 15.96% वोट कटने से राजनीतिक संतुलन बदलने की संभावना है। बरेली जिले में 7,16,509 मतदाता सूची से हटाए गए, जिससे बीजेपी की बेचैनी बढ़ गई है। बदायूं जिले में कुल 4.93 लाख वोट सूची से हटाए गए हैं।

रालोद और अन्य जिलों का हाल:
बागपत जिले में रालोद और बीजेपी के गढ़ से 18.15% वोट कटे हैं। हाथरस में 1.89 लाख, कासगंज में 1.72 लाख, अलीगढ़ में 5.20 लाख और आगरा में 8.38 लाख मतदाता सूची से हटाए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार SIR का असर बड़े नेताओं और सियासी दलों के लिए सीधे चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। नेताओं और दलों ने उदासीन मतदाताओं को सक्रिय कर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

 

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