Tuesday, July 21

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर नेहरू थे विरोधी, बीजेपी ने फिर उठाया मुद्दा

नई दिल्ली: सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के मुद्दे पर देश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। बीजेपी ने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला किया है और सोशल मीडिया पर उनके कई पत्रों का हवाला देते हुए दावा किया है कि नेहरू सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के पक्ष में नहीं थे।

बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने X पर पोस्ट करके कहा कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी और हिंदू सांस्कृतिक प्रतीकों के महत्व को कमतर समझा। उन्होंने कहा कि नेहरू ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कैबिनेट मंत्रियों को भी शामिल होने से रोका और मीडिया कवरेज को सीमित करने की कोशिश की।

त्रिवेदी ने 21 अप्रैल 1951 को नेहरू द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखे पत्र का जिक्र किया। इस पत्र में नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के दरवाजों की कहानी को ‘पूरी तरह झूठा’ बताया और पाकिस्तान को खुश करने के लिए मंदिर के पुनर्निर्माण को कम महत्व दिया।

बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि क्यों पंडित नेहरू भारत की सभ्यता और इतिहास की यादों को बचाने के बजाय बाहरी तुष्टीकरण को प्राथमिकता देते थे। उन्होंने कहा कि नेहरू ने दूतावासों को भी सोमनाथ ट्रस्ट की मदद नहीं करने के निर्देश दिए और समारोह में नदियों से पानी मांगने की रिक्वेस्ट को नजरअंदाज किया।

यह चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर में होने वाले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व दौरे के मद्देनजर तेज हुई है। इस पर्व का आयोजन 8 से 11 जनवरी तक किया जाएगा, जिसमें भारत की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक मूल्यों को उजागर करने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

 

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