Tuesday, July 21

नेपाल से आए स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य महाराज ने वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से की मुलाकात

 

 

वृंदावन (मथुरा): नेपाल से आए जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य ने वृंदावन में प्रतिष्ठित संत प्रेमानंद महाराज से भेंट की। स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य ने नेपाल के सभी सनातनी हिंदुओं की ओर से प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया और उनके दीर्घायु की कामना की।

 

स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य रामानंद संप्रदाय के प्रमुख संतों में से एक हैं और नेपाल के वाराहक्षेत्र, चतराधाम (सुनसरी) स्थित श्री रामतारक ब्रह्मपीठ के पीठाधीश्वर हैं। उन्हें ‘महायोगी सिद्ध बाबा’ के नाम से भी जाना जाता है।

 

नेपाल में धार्मिक नेतृत्व:

स्वामी जी ने नेपाल में विशाल हनुमद महायज्ञ जैसे आयोजन किए हैं, जिनमें एक अरब मंत्रों का जप और करोड़ों आहुतियों का संकल्प लिया गया। वे सनातन धर्म के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके माध्यम से लाखों शिष्यों को श्रुति शब्द योग और नाम-जप साधना से जोड़ा गया है।

 

जनमानस को भगवान की ओर लगाना:

स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य महाराज का कहना है कि संतों का सबसे बड़ा कार्य जनमानस को माया से मोड़कर भगवान की ओर लगाना है। उन्होंने नाम जप की महिमा पर जोर देते हुए कहा कि नाम ही प्रेम का मूल है और इसके बिना साधना शून्य के समान है।

 

मानसिक कष्ट और डिप्रेशन का समाधान:

सत्संग में उन्होंने मानसिक कष्ट और आधुनिक समय के डिप्रेशन पर भी चर्चा की। प्रेमानंद महाराज के अनुसार संतों की वाणी का अनुसरण करने से चिंता, भय और शोक से मुक्ति मिलती है। कई लोग जो पहले दवाइयों पर निर्भर थे, वे केवल नाम जप के प्रभाव से स्वस्थ हो गए।

 

योग शक्ति और संत-भगवंत एकता:

स्वामी जी के शिष्य ने बताया कि उनके गुरुदेव बिना भोजन और ऑक्सीजन के 9 दिनों तक समाधि में रह सकते हैं। महाराज जी का निष्कर्ष है कि संत और भगवंत अलग नहीं, बल्कि एक ही हैं; भगवान ही संत रूप में जगत का उद्धार करते हैं।

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