Wednesday, July 22

बिंदेश्वरी दुबे जयंती: वही इंजीनियरिंग कॉलेज, जहां पढ़े नीतीश कुमार, पहले बने थे मुख्यमंत्री

 

पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे की आज 14 जनवरी को जयंती है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने उसी बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब NIT पटना) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी, जहां से वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी शिक्षा पूरी की।

 

बिंदेश्वरी दुबे का जन्म भोजपुर जिले के महुआंवा (शाहपुर) गांव में हुआ था। पढ़ाई में तेज होने के बावजूद उनके पिता चाहते थे कि वे खेती में मदद करें। लेकिन बिंदेश्वरी दुबे की शिक्षा के प्रति लगन इतनी प्रबल थी कि वे घर से भाग कर पटना आ गए और अपने मामा के पास रहकर संत माइकल स्कूल में पढ़ने लगे। गणित और भौतिकी में उत्कृष्ट अंक पाने वाले दुबे ने पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए ट्यूशन पढ़ाई और नाइट शिफ्ट नौकरी की।

 

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बिंदेश्वरी दुबे ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और गांधी जी के अनुयायी बनकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। आजादी के बाद वे कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुए और कोलियरी मजदूर संघ और भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

 

1952 में उन्होंने बेरमो विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता। इसके बाद 1962, 1967, 1969 और 1972 में भी वे विधायक चुने गए। 1973 में वे पहली बार केदार पांडेय की सरकार में शिक्षा मंत्री बने। 1980 में गिरिडीह से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। मार्च 1985 में उन्होंने शाहपुर से विधायक रहते बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

 

मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए बिंदेश्वरी दुबे ने धनबाद के कोल माफिया पर शिकंजा कसने की शुरुआत की। इससे विरोध और जगन्नाथ मिश्र गुट के साथ संघर्ष बढ़ गया। गुटबाजी और सामाजिक अस्थिरता के चलते प्रधानमंत्री राजीव गांधी के आदेश पर 13 फरवरी 1988 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

 

बिंदेश्वरी दुबे की जिंदगी और संघर्ष आज भी बिहार की राजनीति में प्रेरणा स्रोत हैं। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन, स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी और जनता के लिए समर्पण उन्हें समाज और राजनीति में एक आदर्श नेता बनाता है।

 

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