Wednesday, July 22

भारत पर ‘जीत’ के बाद JF-17 बेचने के दावे, शहबाज का बयान ब्रह्मोस हमले और एयरबेस नुकसान के बावजूद पाकिस्तान का दावा

 

 

पाकिस्तान, जो 1971 की जंग में आधा मुल्क खो चुका था, अब भी अपनी सैन्य उपलब्धियों को लेकर ‘विजेता’ होने का दावा करता है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि “पिछले साल की सैन्य सफलताओं के बाद पाकिस्तान का रक्षा उत्पादन और मजबूती से बढ़ा है।”

 

पाकिस्तानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान सऊदी अरब, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, सूडान और लीबिया जैसे देशों को JF-17 लड़ाकू विमान बेच रहा है। हालांकि, इन देशों में लीबिया के अलावा किसी ने भी पाकिस्तान के दावों की पुष्टि नहीं की है।

 

शहबाज का बयान और सैन्य उपलब्धियां

 

शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान एयर फोर्स ने तैमूर सिस्टम का सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जबकि पाकिस्तान नेवी ने LY-80 सिस्टम का परीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इन सफलताओं से पाकिस्तान की रक्षा क्षमताएं मजबूत हुई हैं और फाइटर जेट्स की वैश्विक मांग बढ़ी है। शहबाज ने दावा किया कि कई देशों ने पाकिस्तान के साथ सक्रिय बातचीत शुरू कर दी है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पाकिस्तान ने पिछले साल भारत से बचाने के लिए 100 से अधिक बार मदद की गुहार लगाई थी। ऐसे में JF-17 लड़ाकू विमान बेचने के दावे को पाकिस्तान की छवि सुधारने और फर्जी प्रचार के तौर पर देखा जा रहा है।

 

चीन का हाथ?

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रचार अभियान के पीछे चीन का इशारा भी हो सकता है, क्योंकि JF-17 विमान में 65 प्रतिशत चीनी टेक्नोलॉजी है, जबकि पाकिस्तान का हिस्सा मात्र 35 प्रतिशत है। इसका उद्देश्य चीन की लड़ाकू विमानों की वैश्विक बिक्री को बढ़ावा देना भी माना जा रहा है।

 

पाकिस्तान का रुख

 

भले ही पाकिस्तान ने भारत के ब्रह्मोस हमले और कम से कम 6-7 लड़ाकू विमानों के नुकसान को झेला हो, फिर भी देश की सरकार और मीडिया लगातार अपनी सैन्य ताकत और जीत का दावा कर रहे हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह पाकिस्तान का परंपरागत रुख है — अपनी हार स्वीकार न करना और हर उपलब्धि को ‘विजय’ के रूप में प्रस्तुत करना।

 

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