Tuesday, July 21

68 की उम्र में विधायक बने और एमए फाइनल पास किया, जानें राजस्थान के फूलसिंह मीणा की प्रेरक कहानी

 

राजस्थान के उदयपुर ग्रामीण से तीसरी बार विधायक चुने गए फूलसिंह मीणा ने साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। 68 साल की उम्र में उन्होंने जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ से राजनीति विज्ञान में एमए अंतिम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण की। यह उनके जीवन की प्रेरक कहानी न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश के युवाओं और बुजुर्गों के लिए मिसाल बन रही है।

 

बेटियों और परिवार की प्रेरणा से अधूरा सपना हुआ पूरा

 

फूलसिंह मीणा को महज 15 वर्ष की उम्र में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। लेकिन सीखने का जज्बा कभी कम नहीं हुआ। उनके पांचों बेटियों और पत्नी शांति देवी के सहयोग ने उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

 

55 की उम्र में फिर थामी किताबें

 

करीब 40 साल के लंबे अंतराल के बाद, 55 वर्ष की उम्र में फूलसिंह मीणा ने पढ़ाई फिर शुरू की। 2013 में दसवीं की परीक्षा दी, 2015 तक शेष विषय उत्तीर्ण किए। 2017 में 12वीं पास की और अब एमए फाइनल तक का सफर पूरा किया। राजनीति में सक्रिय रहते हुए भी उन्होंने पढ़ाई के लिए समय निकाला और क्षेत्रीय दौरों में ऑडियो नोट्स और किताबों के माध्यम से अध्ययन जारी रखा। उनका मानना है कि शिक्षा जनप्रतिनिधियों को बेहतर और पारदर्शी बनाती है।

 

समाज और बेटियों के लिए प्रेरक कार्य

 

विधायक फूलसिंह मीणा वर्तमान में विधानसभा की जनजाति कल्याण समिति के सभापति हैं। इसके बावजूद शिक्षा और समाज सुधार को हमेशा प्राथमिकता दी। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर वे क्षेत्र की प्रतिभाशाली बेटियों को हवाई यात्रा कराकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य भी कर रहे हैं।

 

उम्र और परिस्थितियों को नहीं बनने दिया बाधक

 

फूलसिंह मीणा का संदेश साफ है – मजबूत इरादों के सामने उम्र और कठिन परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बन सकतीं। उनका यह जीवन सफर उन सभी के लिए प्रेरणा है, जिन्होंने किसी कारणवश अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी।

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