Tuesday, July 21

शुगर फ्री कारोबार में मचेगी बड़ी हलचल: ‘टैगाटोज’ से हिल सकता है आर्टिफिशियल स्वीटनर बाजार

 

भारत, जिसे दुनिया की ‘डायबिटीज कैपिटल’ कहा जाता है, वहां शुगर फ्री और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का बाजार तेजी से फल-फूल रहा है। लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक नई खोज इस पूरे उद्योग का गणित बदल सकती है। इस प्राकृतिक शक्कर का नाम है टैगाटोज (Tagatose), जो स्वाद में लगभग आम चीनी जितनी मीठी है, लेकिन कैलोरी और ब्लड शुगर पर असर बेहद कम डालती है।

 

क्या है टैगाटोज और क्यों है खास?

 

वैज्ञानिकों के अनुसार टैगाटोज सामान्य शक्कर की तुलना में करीब 92% तक मीठी होती है, जबकि इसमें कैलोरी सिर्फ एक तिहाई रहती है। सबसे अहम बात यह है कि यह ब्लड ग्लूकोज लेवल को तेजी से नहीं बढ़ाती, जिससे यह डायबिटीज मरीजों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकती है।

 

इसके अन्य फायदे भी चौंकाने वाले हैं—

 

यह दांतों के लिए सुरक्षित मानी जाती है और मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया को कम कर सकती है।

यह तेज गर्मी में भी स्थिर रहती है, यानी बेकिंग और कुकिंग में आसानी से इस्तेमाल हो सकती है।

कई आर्टिफिशियल स्वीटनर्स की तरह इसमें कड़वा आफ्टर-टेस्ट नहीं होता।

 

यही वजह है कि टैगाटोज को शुगर फ्री उत्पादों का “नेचुरल गेमचेंजर” माना जा रहा है।

 

कहां से निकलती है टैगाटोज?

 

टैगाटोज प्राकृतिक रूप से कुछ फलों और डेयरी उत्पादों में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है। अब तक इसकी बड़ी मात्रा में उत्पादन लागत ज्यादा और प्रक्रिया जटिल होने के कारण संभव नहीं हो पाया था।

 

लेकिन अब अमेरिका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मैनस बायो (Manus Bio) और भारत की केकैट एंजाइमेटिक (Kcat Enzymatic) के साथ मिलकर टैगाटोज बनाने का एक नया, ज्यादा किफायती और असरदार तरीका विकसित किया है। इस शोध को प्रतिष्ठित जर्नल Cell Reports Physical Science में प्रकाशित किया गया है।

 

अरबों डॉलर का बाजार खतरे में

 

फिलहाल दुनिया भर में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का बाजार 4 से 10 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है, जिसके 2030 तक 15–16 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह बाजार हर साल 4–8% CAGR की दर से बढ़ रहा है।

 

लेकिन टैगाटोज के बड़े पैमाने पर बाजार में आने से यह पूरा उद्योग हिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता धीरे-धीरे आर्टिफिशियल स्वीटनर्स छोड़कर इस प्राकृतिक विकल्प की ओर रुख कर सकते हैं।

 

कब तक बाजार में आएगी टैगाटोज?

 

शोधकर्ताओं का कहना है कि उत्पादन प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए अभी कुछ और काम बाकी है। हालांकि, बढ़ती मांग को देखते हुए अनुमान है कि वैश्विक टैगाटोज बाजार 2032 तक 250 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

 

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आने वाले वर्षों में टैगाटोज न सिर्फ शुगर फ्री प्रोडक्ट्स की परिभाषा बदल देगी, बल्कि डायबिटीज मरीजों के लिए एक नई उम्मीद भी बन सकती है।

 

निष्कर्ष:

टैगाटोज की खोज आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कम कैलोरी, लगभग समान मिठास और सेहत के अनुकूल गुणों के साथ यह प्राकृतिक शक्कर आने वाले समय में शुगर फ्री उद्योग की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।

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