Tuesday, July 21

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: अजित पवार की एनसीपी को झटका, 13 उम्मीदवारों की जमानत जब्त

पटना/मुंबई: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अजित पवार की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को बड़ा झटका लगा है। एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ी एनसीपी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। पार्टी ने कुल 15 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिनमें से 13 की जमानत जब्त हो गई। अजित पवार की पार्टी को महज 0.02% वोट ही मिले, जिससे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने का उनका सपना चूर हो गया।

नतीजे चौंकाने वाले

नतीजों के मुताबिक, एनसीपी के अधिकांश उम्मीदवारों को एक हजार वोट भी नहीं मिले। कुछ सीटों पर तो स्थिति इतनी खराब रही कि उम्मीदवारों को 500 वोट से भी कम मिले। सासाराम में एनसीपी के उम्मीदवार आशुतोष सिंह को मात्र 212 वोट मिले, जबकि नोटा को 369 वोट मिले। नौतन के उम्मीदवार जय प्रकाश को सिर्फ 186 वोट ही मिल पाए।

इसके अलावा मनिहारी में सैफ अली खान को 2057 वोट, पारसा में बिपिन सिंह को 435 वोट, महुआ में अखिलेश ठाकुर को 643 वोट और राघोपुर में अनिल सिंह को 602 वोट ही मिले।

एनसीपी का बुरा हाल

अजित पवार की पार्टी ने इस चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने की उम्मीद जताई थी, ताकि उसे फिर से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सके। लेकिन बिहार की जनता ने पवार की इस उम्मीद पर पानी फेर दिया। कई सीटों पर तो एनसीपी के उम्मीदवारों का प्रदर्शन इस कदर खराब रहा कि उनकी जमानत तक जब्त हो गई।

पार्टी के लिए यह नतीजे एक बड़ा झटका साबित हुए हैं, क्योंकि इसके साथ ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने के लिए एनसीपी के पास जरूरी वोट प्रतिशत भी नहीं है।

शिवसेना (शिंदे गुट) और बीजेपी का उत्साह

बिहार चुनाव के नतीजों के बाद महाराष्ट्र बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने जीत का उत्सव मनाया। शिंदे गुट के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि यह ऐतिहासिक जनादेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता के विश्वास का प्रतीक है। वहीं महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने बिहार की जनता के द्वारा विपक्षी गठबंधन को नकारे जाने को प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जीत करार दिया।

इस बीच एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि बिहार की जनता ने विकास का रास्ता चुना है और झूठ फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है।


इस नतीजे के बाद अब अजित पवार की पार्टी के लिए आगे की रणनीति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, खासकर जब वह राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने में विफल रहे हैं।

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