Tuesday, July 21

क्या फिर एक होंगे नोएडा सीईओ और चेयरमैन? प्रशासनिक गलियारों में तेज हुई चर्चा

 

नोएडा सेक्टर-150 में युवराज मेहता की बेसमेंट में डूबने से हुई मौत और उससे पहले सामने आए कैलेंडर कांड के बाद शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ एम. लोकेश को पद से हटा दिया है। इस कार्रवाई के बाद अब गौतमबुद्ध नगर के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है—क्या नोएडा अथॉरिटी में एक बार फिर सीईओ और चेयरमैन का पद एक ही अधिकारी के पास सौंपा जाएगा?

 

सूत्रों के मुताबिक, शासन पुराने प्रशासनिक मॉडल पर दोबारा विचार कर सकता है, जिसमें एक ही वरिष्ठ अधिकारी को दोहरी जिम्मेदारी दी जाती थी। माना जाता है कि इस व्यवस्था से निर्णय लेने में तेजी आती है और विकास कार्यों में बाधाएं कम होती हैं।

 

लोकेश एम का कार्यकाल सवालों के घेरे में

लोकेश एम के कार्यकाल की समीक्षा करें तो उनके विजन की चर्चा जरूर हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और समयबद्धता को लेकर वे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके। उनके कार्यकाल में बोर्ड बैठकों के केवल करीब 50 प्रतिशत एजेंडे ही पास हो पाए, जबकि बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो सका।

अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासनिक पकड़ कमजोर रहने के कारण कई अहम प्रस्ताव फाइलों में ही अटके रह गए।

 

पुराने मॉडल में हुए ऐतिहासिक फैसले

पिछले 15 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो जब-जब नोएडा में सीईओ और चेयरमैन का पद एक ही अधिकारी के पास रहा, तब-तब शहर ने बड़े और ऐतिहासिक विकास देखे।

इसी दौर में चिल्ला और भंगेल एलिवेटेड रोड, मेट्रो परियोजनाएं, नोएडा इंटरनेशनल गोल्फ कोर्स, हैबिटेट सेंटर जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स आगे बढ़े। साथ ही, बिल्डर-बायर विवादों जैसे जटिल और संवेदनशील मामलों पर भी ठोस निर्णय लिए गए।

 

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जब चेयरमैन शासन स्तर का वरिष्ठ अधिकारी होता है, तो स्टाफ में अनुशासन बना रहता है और बोर्ड बैठकों में रोजमर्रा की समस्याओं का तुरंत समाधान संभव हो पाता है।

 

जल्द हो सकता है बड़ा फैसला

फिलहाल शासन की ओर से किसी नए नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही किसी कद्दावर और अनुभवी सीनियर आईएएस अधिकारी को नोएडा अथॉरिटी की कमान सौंपी जा सकती है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि शासन दोहरी जिम्मेदारी वाला पुराना मॉडल दोबारा लागू करता है या प्रशासनिक ढांचे में कोई नया प्रयोग देखने को मिलेगा।

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