Tuesday, July 21

घर में खड़ी कार से तीन महीने तक कटता रहा टोल टैक्स गाजियाबाद में नंबर प्लेट और फास्टैग क्लोनिंग का चौंकाने वाला मामला, पीड़ित को दफ्तरों के चक्कर

गाजियाबाद से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक व्यक्ति की कार तीन महीने से घर में खड़ी होने के बावजूद लगातार टोल टैक्स कटता रहा। मामला सामने आने के बाद जब पीड़ित ने शिकायत की, तो जिम्मेदार अधिकारी उसे इधर-उधर भटकाते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।

 

यह मामला वैशाली के रामप्रस्था ग्रीन (सेक्टर-7) निवासी और जम्मू-कश्मीर के सेवानिवृत्त अधिकारी रवि कुमार कौल से जुड़ा है। उनकी होंडा सिटी कार घर में खड़ी थी, जबकि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी गाड़ी का नंबर और फास्टैग क्लोन कर देश की सड़कों पर बेखौफ गाड़ी दौड़ाई। इसका खामियाजा पीड़ित को भुगतना पड़ा और टोल टैक्स की राशि उनके खाते से कटती रही।

 

रवि कुमार कौल के मोबाइल फोन पर 20 अक्टूबर को कानपुर स्थित बाराजोर टोल प्लाजा से 180 रुपये और 22 अक्टूबर को अनंतराम टोल प्लाजा से 110 रुपये कटने के मैसेज आए। जबकि उस समय उनकी कार घर पर ही खड़ी थी। मामले से हैरान रवि कुमार ने तत्काल एनएचएआई (NHAI) को ई-मेल के जरिए शिकायत की, लेकिन इसे तकनीकी त्रुटि बताकर नजरअंदाज कर दिया गया।

 

निराश होकर पीड़ित दिल्ली स्थित परिवहन मंत्रालय पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपनी असली गाड़ी और क्लोन की गई गाड़ी की तस्वीरों में अंतर दिखाकर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उन्हें द्वारका स्थित फास्टैग कार्यालय भेज दिया गया, लेकिन वहाँ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

 

नंबर प्लेट और फास्टैग क्लोनिंग से बचाव के उपाय

 

साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल के अनुसार, इस तरह की ठगी से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

 

सोशल मीडिया पर अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट की फोटो साझा करने से बचें और समय-समय पर प्लेट की जांच करते रहें।

फास्टैग ब्लॉक होने का दावा करने वाले मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें, इससे आपकी बैंकिंग और निजी जानकारी चोरी हो सकती है।

इंटरनेट पर दिखने वाले फर्जी हेल्पलाइन नंबरों से सावधान रहें, इन पर कॉल करने से ठगी का खतरा रहता है।

वॉट्सऐप पर सस्ते फास्टैग का लालच देने वालों से दूर रहें, कई बार ये पहले से एक्टिवेटेड होते हैं और धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

 

यह मामला न सिर्फ फास्टैग सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि शिकायत के बावजूद आम नागरिक को किस तरह दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

 

 

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