Tuesday, July 21

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर जताई गंभीर चिंता, कहा – नाम न होने पर हो सकते हैं गंभीर परिणाम

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गंभीर नागरिक परिणामों की चेतावनी दी है। न्यायालय ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होते, उनके अधिकारों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

 

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह टिप्पणी बिहार समेत कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की। पीठ ने कहा कि कोई भी शक्ति निरंकुश नहीं हो सकती और निर्वाचन आयोग को प्रक्रियाओं के तहत काम करना होगा।

 

न्यायालय ने निर्वाचन आयोग द्वारा प्रस्तुत दलीलों को भी सुना। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने धारा 21(3) का हवाला देते हुए कहा कि आयोग को विशेष पुनरीक्षण की स्वतंत्र शक्ति प्राप्त है, लेकिन इसे मनमाने ढंग से लागू नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया कि क्या आयोग इस प्रक्रिया में स्वयं निर्धारित दस्तावेज़ों और नियमों को दरकिनार कर सकता है।

 

एसआईआर प्रक्रिया में 11 दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जबकि सामान्य फॉर्म-6 में सात दस्तावेज़ चाहिए। पीठ ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि प्रक्रिया न्यायसंगत, निष्पक्ष और पारदर्शी हो और संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत वयस्क मताधिकार की गारंटी का उल्लंघन न हो।

 

सुनवाई गैर-सरकारी संगठन एडीआर द्वारा दायर याचिकाओं पर जारी है, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया की वैधता और संवैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं।

 

 

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