Tuesday, July 21

महाविनाश की चेतावनी: अरुणाचल की कलाई-II जलविद्युत परियोजना पर पर्यावरणविदों और स्थानीय आदिवासियों की चिंता

 

अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश सरकार लोहित नदी पर 1,200 मेगावॉट की कलाई-II जलविद्युत परियोजना को रन-ऑफ-रिवर डिजाइन के कारण पर्यावरणीय रूप से अनुकूल मान रही है। परियोजना से रोजगार के हजारों अवसर और चीन से सटे रणनीतिक क्षेत्र में सुरक्षा लाभ मिलने की संभावना है।

 

हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञ और स्थानीय आदिवासी इसे गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं। परियोजना से सफेद पेट वाले बगुले जैसी क्रिटिकली एंडेंजर्ड प्रजातियों का निवास प्रभावित होगा, मछलियों के प्रजनन मार्ग बाधित होंगे और भूस्खलन, बाढ़ व भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ जाएगा। लोहित नदी के महत्वपूर्ण हिस्सों का जलग्रहण और प्रवाह प्रभावित होने से पूर्वोत्तर की जैव-विविधता और स्थानीय आजीविका पर भी संकट आएगा।

 

आदिवासी गांवों में कलाई-II के खिलाफ विरोध तेज है। लगभग 1,500 लोग विस्थापित हो सकते हैं, कृषि, मछली पकड़ना और वन आधारित आजीविका प्रभावित होगी। सामाजिक प्रभाव आकलन प्रक्रिया अपारदर्शी रही और स्थानीय समुदायों की सहमति शामिल नहीं की गई।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी पारिस्थितिकी को प्राथमिकता देकर विकास किया जाना चाहिए। इसके लिए बेसिन-स्तरीय अध्ययन, पारदर्शी EIA प्रक्रिया और स्थानीय समुदायों की वास्तविक सहमति अनिवार्य है। सुझाव में आर्टिफिशियल फीडिंग जोन, नेस्टिंग मॉनिटरिंग, विस्थापितों के लिए पुनर्वास, स्थानीय हिस्सेदारी और ‘नो-डैम जोन’ जैसे कदम शामिल हैं। यदि ये उपाय अपनाए गए, तो कलाई-II परियोजना न केवल ऊर्जा उत्पादन करेगी, बल्कि स्थानीय विश्वास और टिकाऊ विकास सुनिश्चित कर सकेगी।

 

 

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.