Tuesday, July 21

ढेंकनाल में पादरी पर भीड़ का अमानवीय हमला, चार आरोपी हिरासत में

भुवनेश्वर। ओडिशा के ढेंकनाल जिले के पारजंग इलाके में एक पादरी के साथ कथित तौर पर भीड़ द्वारा की गई बर्बरता ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। 4 जनवरी को हुई इस घटना में पादरी पर जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए 15–20 लोगों की भीड़ ने उनके चेहरे पर सिंदूर मल दिया, जूतों की माला पहनाई और पूरे गांव में घुमाया। आरोप है कि उन्हें नाली का पानी पिलाने और मंदिर में झुकने के लिए भी मजबूर किया गया। मामले में पुलिस ने अब चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

पादरी की पत्नी के अनुसार, उनके पति को एक ग्रामीण ने स्वास्थ्य संबंधी प्रार्थना के लिए अपने घर बुलाया था। इसी दौरान भीड़ वहां पहुंची और बिना किसी ठोस सबूत के धर्मांतरण का आरोप लगाकर हमला कर दिया। पत्नी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस मौके पर देर से पहुंची और प्रारंभिक शिकायत के बावजूद कई दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में उन्होंने पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया, जिसके बाद 13 जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस अधीक्षक अभिनव सोनकर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी है और हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ आरोपों की पुष्टि शिकायत में नहीं है, लेकिन तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है।

इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने इसे “मानवता के लिए एक नया निम्न स्तर” करार दिया है। बीजेडी प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने इसे ओडिया अस्मिता के खिलाफ बताते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की, जबकि भाजपा ने विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है।

राष्ट्रीय ईसाई मंच की ओडिशा इकाई ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है। मंच का कहना है कि प्रार्थना सभाओं को गलत तरीके से धर्मांतरण गतिविधि बताकर अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

यह घटना भुवनेश्वर से करीब 120 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित पारजंग क्षेत्र की है। पुलिस का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की हिंसा या कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

 

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