Tuesday, July 21

पीएम मोदी के सामने ट्रंप हुआ नरम, भारत की कूटनीति ने अमेरिका को झुकाया

 

 

नई दिल्ली, 22 जनवरी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रति अपना रुख अचानक नरम कर लिया है। स्विट्जरलैंड के दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुझे बहुत आदर है। वह शानदार व्यक्ति और मेरे दोस्त हैं। हम अच्छा ट्रेड डील करने जा रहे हैं।” यह वही ट्रंप हैं, जिन्होंने पहले भारत पर 50% टैरिफ लगाया था और देश की तेल नीति पर दबाव डालने की कोशिश की थी।

 

पीएम मोदी की कूटनीति का असर

भारत ने स्पष्ट कर दिया कि अपनी नीति और राष्ट्रहित को किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव से प्रभावित नहीं होने देंगे। इसके परिणामस्वरूप ट्रंप की कठोरता नरम हुई। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ही अमेरिकी निवेशक डेविड रूबेनस्टीन ने कहा कि अगले 20-30 साल में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

 

भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का दबाव

अमेरिका को इस बात की भी जानकारी है कि अगले सप्ताह भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार संधि (FTA) की घोषणा होने वाली है। यह संधि दुनिया की करीब 2 अरब आबादी और 25% GDP को कवर करेगी। यूरोप की ओर बढ़ते भारत की अर्थव्यवस्था ने अमेरिका को रणनीतिक रूप से सावधान कर दिया।

 

खाड़ी देशों और रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत

भारत का प्रभाव खाड़ी देशों में भी बढ़ रहा है। हाल ही में भारत और UAE ने 2032 तक व्यापार दोगुना करने का करार किया। रक्षा क्षेत्र में भी भारत अब मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर सौदे कर रहा है। “आत्मनिर्भर भारत” के आधार पर भारत और यूरोपियन यूनियन नई सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी के लिए तैयार हैं।

 

बदलती जियोपॉलिटिक्स में भारत की सफलता

ट्रंप प्रशासन की नजर में भारत अब वैश्विक स्तर पर मजबूती से उभर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर, ईरान और ग्रीनलैंड जैसे मामलों में अमेरिका की कोशिशों के बीच, पीएम मोदी की नेतृत्व में भारत ने कूटनीति और रणनीति में सफलता पाई। इसके चलते अमेरिका को भारत के समक्ष नरम पड़ना पड़ा और रणनीतिक झुकाव दिखा।

 

भारत की यह कूटनीति यह साबित करती है कि अब देश न केवल आर्थिक, बल्कि रणनीतिक और रक्षा क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

 

 

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