Tuesday, July 21

यूरोप बाहर, पुतिन अंदर: ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस पश्चिमी एकता को तोड़ सकता है

 

वॉशिंगटन/मॉस्को/दावोस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने की खबर ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। बोर्ड का उद्देश्य गाजा में युद्धविराम समझौते की निगरानी और क्षेत्रीय शांति स्थापित करना है, लेकिन यूरोप की बड़ी शक्तियों ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया है।

 

क्रेमलिन ने बताया कि रूस इस न्योते का जवाब तब देगा जब विदेश मंत्रालय इसे पूरी तरह समीक्षा कर ले और रणनीतिक साझेदारों से विचार-विमर्श कर ले। रूस ने बोर्ड में स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर शुल्क के संदर्भ में भी दांव खेला है और कहा है कि यह शुल्क यूक्रेन युद्ध के बाद जब्त की गई रूसी संपत्तियों से ही भुगतान किया जाएगा।

 

ट्रंप ने दुनिया के 59 नेताओं को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। अब तक इजरायल, मिस्र, सऊदी अरब, यूएई, तुर्की, मोरक्को, कतर, जॉर्डन, वियतनाम, कजाकिस्तान, हंगरी, अर्जेंटीना, बेलारूस, कोसोवो और पाकिस्तान ने न्योता स्वीकार किया है।

 

यूरोपीय देश इस बोर्ड में शामिल होने के लिए उत्सुक नहीं दिख रहे हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने समय मांगा है, जर्मनी और फ्रांस ने स्पष्ट तौर पर इसमें शामिल न होने का निर्णय लिया है।

 

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को भी आमंत्रित किया गया है, लेकिन उन्होंने कहा कि रूस के साथ बोर्ड में बैठना उनके लिए कठिन स्थिति है। जेलेंस्की ने पत्रकारों से कहा, “ईमानदारी से कहूं तो रूस हमारा दुश्मन है और बेलारूस उसका सहयोगी। मेरे लिए यह कल्पना करना मुश्किल है कि हम एक ही बोर्ड में कैसे बैठेंगे।”

 

ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के अनुसार अब तक 20-25 नेता बोर्ड में शामिल होने पर सहमत हो चुके हैं। गुरुवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोर्ड के चार्टर पर हस्ताक्षर किए जाने हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप का यह कदम अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव बढ़ाने के साथ-साथ पश्चिमी एकता को चुनौती देने वाला साबित हो सकता है।

 

 

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