Tuesday, July 21

भारत के फैसले से हिल गया पाकिस्तान संसद में गूंजा सिंधु जल संधि का मुद्दा, कृषि तबाही का डर सताने लगा

 

इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि को स्थगित करने के भारत के फैसले ने पाकिस्तान की बेचैनी और बढ़ा दी है। भारत के इस कड़े कदम का असर अब पाकिस्तान की संसद तक साफ नजर आने लगा है। नेशनल असेंबली में सरकार को स्वीकार करना पड़ा है कि भारत की ओर से किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण देश में जल संकट और कृषि तबाही का खतरा गहराता जा रहा है।

 

पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय ने संसद को बताया कि सिंधु जल संधि पर इस्लामाबाद की बार-बार अपील और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाई गई चिंताओं के बावजूद भारत ने कोई जवाब नहीं दिया है। मंत्रालय के मुताबिक, भारत द्वारा संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित किए जाने से लाखों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था फैसला

 

भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का फैसला किया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी और इसके तार पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद से जुड़े बताए गए थे। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए जल कूटनीति का सबसे सख्त हथियार इस्तेमाल किया।

 

सिंधु जल संधि के तहत भारत से होकर बहने वाली तीन पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—का पानी पाकिस्तान को मिलता है, जबकि तीन पूर्वी नदियों पर भारत का अधिकार है। पाकिस्तान के लिए ये नदियां खासकर पंजाब प्रांत की खेती की लाइफलाइन मानी जाती हैं।

 

पाकिस्तान में कृषि पर मंडराता संकट

 

पाकिस्तानी जल संसाधन मंत्रालय ने संसद में चेतावनी दी कि चिनाब नदी में पानी की कमी से हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं।

 

मराला हेडवर्क्स से निकलने वाली अपर चेनाब नहर से सिंचित होने वाली करीब 1.45 करोड़ एकड़ भूमि पर खतरा मंडरा रहा है।

वहीं, खानकी हेडवर्क्स से जुड़ी नहरों से सिंचित 30.9 लाख एकड़ कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है।

 

मंत्रालय ने दावा किया कि नदी के जलस्तर में गिरावट से फसलों की बुआई, सिंचाई चक्र और किसानों की आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा।

 

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी रोता रहा पाकिस्तान

 

पाकिस्तान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाने की कोशिश की, लेकिन वहां से भी उसे कोई ठोस राहत नहीं मिली। जल संसाधन मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधियों ने 16 दिसंबर 2025 तक भारत से जवाब देने को कहा था, लेकिन तय समयसीमा बीतने के 34 दिन बाद भी भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

 

पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त कार्यालय ने दिसंबर 2025 में आरोप लगाया था कि 10 से 16 दिसंबर के बीच चिनाब नदी के बहाव में असामान्य कमी दर्ज की गई। एक समय नदी का बहाव घटकर 870 क्यूसेक तक पहुंच गया। पाकिस्तान ने भारत पर पानी रोकने का आरोप लगाया और बगलिहार बांध से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला दिया।

 

भारत का स्पष्ट संदेश

 

विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह रुख सिर्फ जल विवाद नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ रणनीतिक दबाव का हिस्सा है। नई दिल्ली साफ कर चुकी है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक द्विपक्षीय समझौतों पर नरमी की उम्मीद नहीं की जा सकती।

 

सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख पाकिस्तान के लिए यह संकेत है कि अब आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।

 

 

 

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