Tuesday, July 21

इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: 12वीं के छात्र की आय को शून्य मानना गलत, मुआवजा बढ़ाकर 16 लाख से अधिक किया

 

 

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मृत 12वीं कक्षा के छात्र की आय को केवल छात्र होने के आधार पर शून्य मानना गलत बताया है। कोर्ट ने इस मामले में मृतक के परिवार को मुआवजे की राशि 2.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 16,04,092 रुपये करने का आदेश दिया।

 

यह मामला बुलंदशहर जिले से जुड़ा है, जहां कश्मीरी मूल के अंकित की 10 जून 2014 को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बस से हुई सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। हादसे के समय अंकित 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था।

 

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने मृतक छात्र होने के आधार पर उसकी वार्षिक आय केवल 15,000 रुपये मानकर कुल मुआवजा 2,60,000 रुपये निर्धारित किया था। परिजनों ने इसे न्यायसंगत नहीं मानते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

 

न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि मृतक की वास्तविक आय या पेशे से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है, तो उसे अकुशल श्रमिक माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी माना कि 12वीं कक्षा का छात्र भविष्य में कमाई करने की पूरी क्षमता रखता था, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

कोर्ट ने वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी 6,362 रुपये प्रति माह मानकर मासिक आय की गणना की और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इसमें 50 प्रतिशत वृद्धि भी जोड़ी।

 

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद, हाईकोर्ट ने मुआवजा राशि बढ़ाकर 16,04,092 रुपये करने का आदेश दिया और इसके साथ ही 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी निर्धारित किया। कोर्ट ने UPSRTC को निर्देश दिया कि यह राशि मृतक के परिजनों को दो महीने के भीतर अदा की जाए, ताकि परिवार को आर्थिक राहत मिल सके।

 

 

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.