
नई दिल्ली, 22 जनवरी।
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और अदम्य साहस के प्रतीक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को पूरे देश में पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन केवल एक महापुरुष को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन, बलिदान और देशभक्ति की भावना को पुनः जागृत करने का पर्व है। शैक्षणिक संस्थानों में इस अवसर पर भाषण, निबंध और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
नेताजी का जीवन और विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनका ओजस्वी नेतृत्व, क्रांतिकारी सोच और आज़ादी के लिए दिया गया संदेश हर पीढ़ी को देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है।
पराक्रम दिवस और सुभाष चंद्र बोस जयंती पर 10 पंक्तियाँ (भाषण-निबंध के लिए)
हर वर्ष 23 जनवरी को पराक्रम दिवस बहादुरी और देशभक्ति के सम्मान में मनाया जाता है।
इस दिन महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती होती है।
नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में हुआ था।
वर्ष 2026 में देश उनकी 129वीं जयंती मना रहा है।
नेताजी ने अपना संपूर्ण जीवन भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया।
उन्हें आज़ाद हिंद फौज के साहसी नेतृत्व के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है।
पराक्रम दिवस साहस, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।
उनका नारा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” आज भी जन-जन को प्रेरित करता है।
यह दिन युवाओं को निडर नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा का संदेश देता है।
पराक्रम दिवस पर हम नेताजी के आदर्शों को अपनाने और राष्ट्रसेवा का संकल्प लेते हैं।
पराक्रम दिवस का महत्व
पराक्रम दिवस वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को अनुशासन, निर्भीकता और देशप्रेम का महत्व समझाता है। यह दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों और इंडियन नेशनल आर्मी के बलिदानों को नमन करने का अवसर है। देशभर में इस दिन विविध कार्यक्रम, भाषण और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित कर राष्ट्र उनके योगदान को स्मरण करता है।
पराक्रम दिवस हमें यह संदेश देता है कि
राष्ट्र की स्वतंत्रता और गौरव की रक्षा के लिए साहस और त्याग सबसे बड़ा पराक्रम है।
Related


This slideshow requires JavaScript.


