Tuesday, July 21

पेरेंट्स सावधान! न्यू बॉर्न बेबी को इन दो पोज़िशन में सुलाना हो सकता है जानलेवा

नवजात शिशु की देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ा खतरा बन सकती है। खासकर बच्चे को सुलाने के तरीके में की गई गलती उसकी जान तक जोखिम में डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल कई नवजात शिशुओं की मौत केवल गलत स्लीप पोज़िशन और असुरक्षित माहौल के कारण हो जाती है।

पीडियाट्रिशियन डॉ. निमिषा अरोड़ा के अनुसार, माता-पिता को यह जानना बेहद जरूरी है कि बच्चे को किस पोज़िशन में सुलाना सुरक्षित है और किन परिस्थितियों से उसे दूर रखना चाहिए।

नींद में हुई मौत, बना चेतावनी का कारण

डॉ. अरोड़ा बताती हैं कि हाल ही में एक मामला सामने आया, जिसमें एक नवजात शिशु की मौत मां-पिता के बीच कंबल में सोते समय दम घुटने से हो गई। यह घटना उन खतरों की ओर इशारा करती है, जिनके बारे में अक्सर पेरेंट्स अनजान रहते हैं।

क्या है सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (SIDS)?

नींद के दौरान बिना किसी स्पष्ट कारण के होने वाली शिशु की अचानक मौत को सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (SIDS) कहा जाता है। यह समस्या एक साल से कम उम्र के बच्चों में देखी जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही स्लीप प्रैक्टिस अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इन दो पोज़िशन में कभी सुलाएं बच्चा

विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात को

  • पेट के बल (प्रोन पोज़िशन)
  • साइड पोज़िशन

में सुलाना बेहद खतरनाक हो सकता है। इन दोनों ही पोज़िशन में दम घुटने और SIDS का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

पीठ के बल सुलाना सबसे सुरक्षित

डॉ. अरोड़ा का कहना है कि बच्चे को हमेशा पीठ के बल (बैक पोज़िशन) ही सुलाना चाहिए। साथ ही, बच्चे को सख्त और सपाट सतह पर सुलाना जरूरी है। सोफा, नरम गद्दे या रिक्लाइनर जैसी जगहें नवजात के लिए असुरक्षित होती हैं।

बच्चे के आसपास रखें ये चीजें

जिस जगह बच्चा सो रहा हो, वहां

  • तकिया
  • कंबल
  • रजाई
  • खिलौने
  • कोई भी ढीली या नरम वस्तु

नहीं होनी चाहिए। ये सभी चीजें नींद में बच्चे के मुंह या नाक को ढक सकती हैं और एक्सिडेंटल डेथ का कारण बन सकती हैं।

ओवरलेयरिंग से बचें पेरेंट्स

कई माता-पिता बच्चे को जरूरत से ज्यादा कपड़े पहना देते हैं और ऊपर से कंबल भी ओढ़ा देते हैं। विशेषज्ञों का नियम साफ है—
बच्चे को पेरेंट्स से सिर्फ एक लेयर ज्यादा कपड़े पहनाएं।

रूम शेयर करें, बेड शेयर नहीं

डॉ. अरोड़ा के अनुसार, आदर्श स्थिति यह है कि बच्चा एक साल की उम्र तक माता-पिता के साथ एक ही कमरे में सो सकता है, लेकिन बेड शेयरिंग से बचना चाहिए
अगर किसी स्थिति में बेड शेयर करना पड़े, तो यह सुनिश्चित करें कि

  • बच्चा पीठ के बल सोए
  • पास में कंबल या रजाई न हो
  • माता-पिता शराब के सेवन में न हों और अत्यधिक थके न हों

सतर्कता ही सुरक्षा है

विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित नींद से जुड़ी ये छोटी-छोटी सावधानियां नवजात की जान बचा सकती हैं। सही जानकारी और जागरूकता ही SIDS जैसे खतरों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी शंका या समस्या की स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

 

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