Tuesday, July 21

‘हलाला’ के नाम पर महिला से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप पति समेत कई नामजद, ट्रिपल तलाक कानून की कानूनी खामियां आईं सामने

नई दिल्ली/अमरोहा।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से सामने आया एक मामला न सिर्फ तीन तलाक कानून की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि उससे जुड़े उन कानूनी और सामाजिक अंधेरे पहलुओं पर भी सवाल खड़े करता है, जिन पर अब तक व्यापक चर्चा नहीं हो सकी है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि तत्काल तीन तलाक दिए जाने के बाद उसे दोबारा निकाह के नाम पर ‘हलाला’ की आड़ में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनाया गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में 9 दिसंबर 2025 को एफआईआर दर्ज की थी। पीड़िता के अनुसार, उसके पति, देवर और कुछ मौलवियों ने उसे बार-बार हलाला के लिए मजबूर किया और धमकाकर शारीरिक शोषण किया गया।

क्या है आरोप

पीड़िता का कहना है कि तीन तलाक के बाद उसे यह कहकर दबाव में रखा गया कि दोबारा पति के साथ रहने के लिए हलाला जरूरी है। इसी बहाने उसे अलग-अलग लोगों के पास भेजा गया और उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए गए। महिला ने अपनी शिकायत में इसे गैंगरेप बताया है।

पुलिस की कार्रवाई, POCSO भी शामिल

पुलिस ने इस मामले में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 3 और 4 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की दुष्कर्म और धमकी से जुड़ी धाराएं लगाई हैं।
जांच के दौरान पीड़िता के इस बयान के बाद कि उसकी जबरन शादी वर्ष 2015 में 15 वर्ष की उम्र में कराई गई थी, पुलिस ने मामले में POCSO एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी हैं।

अमरोहा पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक हकीम और पति के चचेरे भाई सहित अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

पीड़िता की आपबीती

पीड़िता (नाम परिवर्तित) अलीगढ़ के एक प्रतिष्ठित स्कूल की पूर्व छात्रा है। उसने पुलिस को बताया कि उसे 2016 और 2021 में दो बार तीन तलाक दिया गया और इसके बाद तीन बार हलाला के नाम पर जबरन सुलह कराई गई।
महिला का कहना है, हर बार मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मुझे किसी और को सौंप दिया गया हो। शर्म और डर के कारण मैं किसी से कुछ कह नहीं सकी, यहां तक कि अपनी बेटी से भी।”

कानून में खामियों पर उठे सवाल

यह मामला 2019 के तीन तलाक कानून की सीमाओं को भी उजागर करता है। जहां यह कानून तत्काल तीन तलाक को अपराध मानता है, वहीं इसमें हलाला का तो उल्लेख है और ही कोई स्पष्ट कानूनी स्थिति

सामाजिक कार्यकर्ता जाकिया सोमन का कहना है, कुरान में हलाला का कोई उल्लेख नहीं है। यह गलत व्याख्या और पितृसत्तात्मक सोच का नतीजा है। शर्म और सामाजिक दबाव के कारण महिलाएं अक्सर सामने नहीं पातीं।”
वहीं, कार्यकर्ता नाइश हसन के अनुसार, निकाह और तलाक का कोई लिखित रिकॉर्ड न होने से ऐसे मामलों में महिलाओं के लिए न्याय पाना बेहद कठिन हो जाता है।

मामला अभी अदालत के अधीन

फिलहाल आरोपी पति न्यायिक हिरासत में है। उसने भी महिला पर झूठा मामला दर्ज कराने और धमकी देने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी है।
गौरतलब है कि हलाला प्रथा को चुनौती देने वाली याचिकाएं अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

 

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