Tuesday, July 21

टैरिफ से बड़ा खतरा प्रदूषण, भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर गीता गोपीनाथ के बयान का शशि थरूर ने किया समर्थन, ‘एयर क्वालिटी जार’ की उठाई मांग

नई दिल्ली।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं से कहीं अधिक बड़ा खतरा भारत की अर्थव्यवस्था को पर्यावरण प्रदूषण से है। यह कहना है हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ का। उनके इस आकलन का समर्थन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने भी किया है।

गुरुवार को दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के सत्र में गीता गोपीनाथ ने कहा कि प्रदूषण से होने वाले आंतरिक नुकसान—जैसे स्वास्थ्य समस्याएं, काम करने की क्षमता में गिरावट और उत्पादकता का नुकसान—वैश्विक टैरिफ बदलावों से पैदा होने वाले जोखिमों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हैं। उन्होंने प्रदूषण को केवल सामाजिक या स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक जोखिम के रूप में रेखांकित किया।

हवा और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी है आर्थिक स्थिरता

गोपीनाथ के अनुसार, किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता अब सीधे तौर पर हवा और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदूषण पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर निवेश, श्रम उत्पादकता और दीर्घकालिक विकास दर पर पड़ेगा।

शशि थरूर ने दोहराई पुरानी चेतावनी

गीता गोपीनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने कहा कि वे पिछले एक दशक से वायु प्रदूषण को राजनीतिक विमर्श का अहम मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 वर्षों तक वायु प्रदूषण पर गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने के बावजूद इस विषय को वह राजनीतिक प्राथमिकता नहीं मिल पाई, जिसकी आवश्यकता थी।

थरूर ने कहा कि अब जाकर यह मुद्दा जनता की चेतना और वैश्विक मंच पर गंभीरता से सामने आया है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

‘एयर क्वालिटी जार’ नियुक्त करने का सुझाव

कांग्रेस सांसद ने पर्यावरण प्रबंधन में बड़े प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता बताते हुए सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री कार्यालय को एक विशेष एयर क्वालिटी जार’ (वायु गुणवत्ता प्रमुख) नियुक्त करना चाहिए।
उनका तर्क था कि ऐसा अधिकारी विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सकेगा, जो फिलहाल अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे हैं। इससे स्वच्छ वायु मिशन को एकीकृत और प्रभावी दिशा मिल सकेगी।

आर्थिक नुकसान के आंकड़े भी चिंताजनक

हालिया अध्ययनों के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण भारत को हर साल अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 1.36 प्रतिशत नुकसान होता है। यह नुकसान मुख्य रूप से कार्यदिवसों के नुकसान, स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च और उत्पादकता में कमी के कारण होता है।

इसके अलावा, उत्तरी भारत में हर साल आने वाला स्मॉग संकट स्कूलों, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक कामकाज को प्रभावित करता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है और उन क्षेत्रों में विदेशी निवेश भी घटता है, जहां श्रमिकों के स्वास्थ्य को खतरा माना जाता है।

 

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