Tuesday, July 21

रात के अंधेरे में समुद्र के बीच रूस का बड़ा खेल, अमेरिका बेबस, भारत-चीन को फायदा

 

 

यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर तेल के आयात प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन रूस ने इसका एक चालाक और पुख्ता जवाब दिया है। समुद्र में उसके शैडो फ्लीट या “डार्क फ्लीट” ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए ट्रैक करना मुश्किल कर दिया है। वहीं, भारत और चीन इस नेटवर्क से लाभान्वित हो रहे हैं।

 

क्या है शैडो फ्लीट:

 

शैडो फ्लीट पुराने या नकली झंडों वाले तेल टैंकरों का एक नेटवर्क है।

इसमें फर्जी लोकेशन भेजना, नाम बदलना और जीपीएस ट्रैकिंग से बचना शामिल है।

इन जहाजों का संचालन जटिल ऑनरशिप और शेल कंपनियों के माध्यम से होता है, जिससे मालिकाना हक और बीमा का पता लगाना मुश्किल होता है।

 

दुनिया भर में फैलाव:

 

Kpler के अनुसार, दुनिया में 3,300 से अधिक शैडो फ्लीट जहाज हैं।

ये जहाज रात में समुद्र में कार्गो ट्रांसफर करते हैं और प्रतिबंधित तेल और सैन्य सामान ले जाते हैं।

रूस के बाल्टिक और ब्लैक सी बंदरगाहों से ये जहाज तेल लेकर निकलते हैं, जिससे सालाना अरबों डॉलर की कमाई होती है।

 

भारत और चीन को फायदा:

 

भारत और चीन प्रमुख खरीदार हैं। 2025 के अंतिम तीन महीनों में दोनों देशों ने शैडो फ्लीट से करीब 20% कच्चा तेल खरीदा।

भारत में अप्रैल 2024 में अमेरिकी टैरिफ के बाद रूसी तेल की खरीद में कमी आई, लेकिन रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है।

 

शैडो फ्लीट का आकार और प्रभाव:

 

2022 में इस बेड़े में केवल 97 जहाज थे, लेकिन 2025 के अंत तक यह बढ़कर 3,313 जहाजों तक पहुंच गया।

पिछले साल इस नेटवर्क ने करीब 100 बिलियन डॉलर का क्रूड ट्रांसपोर्ट किया, जो ग्लोबल ऑयल फ्लो का 6-7% था।

पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस इन जहाजों का उपयोग जासूसी के लिए भी कर रहा है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेटवर्क इतना मजबूत और चतुराईपूर्ण है कि इसे ट्रैक करना मुश्किल है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने तेल की बिक्री में रणनीतिक सफलता हासिल की है, और भारत और चीन इसके प्रमुख लाभार्थी बने हैं।

 

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