Tuesday, July 21

NEET में दिव्यांग कोटा पाने के लिए युवक ने खुद का पैर काटा, जानिए कानून क्या कहता है

जौनपुर, यूपी: नीट में एमबीबीएस एडमिशन पाने की चाहत में जौनपुर के 24 वर्षीय सूरज भास्कर ने एक चौंकाने वाला और खतरनाक कदम उठाया। पुलिस के अनुसार, सूरज ने दिव्यांगता कोटा (PwD) के तहत 5% रिजर्वेशन का लाभ पाने के लिए खुद का बाएं पैर काट लिया

पुलिस ने शुरुआती जांच में बताया कि पहले सूरज ने दावा किया कि उसे अज्ञात लोगों ने पीटा और पैर काट दिया। लेकिन आगे की छानबीन और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से स्पष्ट हुआ कि यह सेल्फ-इन्फ्लिक्टेड इंजरी का मामला है। सूरज ने खुद को सुन्न करने वाला इंजेक्शन लगाकर, धारदार हथियार से अपना पैर काटा। पुलिस को घटनास्थल से इंजेक्शन और रैपर भी मिले हैं।

सूरज भास्कर नीट यूजी में पहले दो बार असफल हो चुका है। पुलिस के अनुसार उसने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दिव्यांगता से जुड़े दस्तावेज लेने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। बाद में निराश होकर उसने यह खतरनाक कदम उठाया। जांच में मिली उसकी डायरी में लिखा है: “मैं 2026 में MBBS डॉक्टर बनूंगा।”

कानूनी दृष्टि:
नीट के माध्यम से एमबीबीएस एडमिशन में PwD कोटा RPWD Act 2016 पर आधारित है। इस नियम के अनुसार 5% हॉरिजेंटल रिजर्वेशन हर कैटेगरी (SC, ST, OBC, EWS) में लागू होता है। लेकिन जानबूझकर खुद को चोट पहुंचाकर कोटा का लाभ लेने की कोशिश फ्रॉड मानी जाती है।

कानून के अनुसार:

  • पहली बार अपराध होने पर 6 महीने तक जेल या 10 हजार रुपये तक जुर्माना, या दोनों।

  • दूसरी बार पकड़े जाने पर 2 साल तक जेल और 50 हजार से 5 लाख रुपये तक जुर्माना।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिव्यांगता का मूल्यांकन संपूर्ण और वैज्ञानिक होना चाहिए, फ्रॉड बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूरज भास्कर के मामले में भी जेल या फाइन या दोनों हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

यह मामला नीट और मेडिकल एडमिशन में कोटा सिस्टम का दुरुपयोग रोकने के लिए सावधान करने वाला उदाहरण है।

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