Tuesday, July 21

बिहार में अब नदियों से बालू-सीमेंट की ढुलाई सड़क और रेल से 3 गुना सस्ता, प्रदेश को मिलेगा वैश्विक व्यापार से कनेक्शन

पटना: बिहार में माल ढुलाई के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब राज्य की गंगा, कोसी, गंडक और सोन जैसी प्रमुख नदियों के जरिए बालू, सीमेंट और भारी माल बड़े जहाजों से ढोया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य परिवहन लागत कम करना, सड़क और रेल पर ट्रैफिक घटाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने केरल के कोच्चि में आयोजित ‘इनलैंड वाटरवेज डेवलपमेंट काउंसिल’ की बैठक में बिहार के 7 राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास का रोडमैप पेश किया। उन्होंने बताया कि जलमार्ग न केवल सस्ता है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। इस योजना के तहत नदियों के किनारे उद्योग और आधुनिक टर्मिनल विकसित किए जाएंगे, जो बिहार को सीधे वैश्विक व्यापार और पड़ोसी देश नेपाल से जोड़ेगा।

सड़क और रेल से 3 गुना सस्ता
परिवहन मंत्री ने बताया कि जलमार्ग से माल ढुलाई की लागत मात्र 1.3 रुपये प्रति टन किलोमीटर है, जो सड़क मार्ग (3.62 रुपये) और रेल (2.41 रुपये) की तुलना में बेहद कम है। भारी सामग्री जैसे बालू, सीमेंट और स्टोन चिप्स की जहाज से ढुलाई होने पर सड़कों पर ट्रैफिक 30 से 40 प्रतिशत तक कम होगा। इससे पुलों और सड़कों के टूटने की समस्या भी समाप्त होगी।

कालूघाट मल्टीमॉडल टर्मिनल: बिहार की व्यापार तस्वीर बदलेगी
सोनपुर के कालूघाट में विकसित मल्टीमॉडल टर्मिनल सालाना 77 हजार कंटेनर लोड और अनलोड करने में सक्षम होगा। यहां एक साथ दो बड़े मालवाहक जहाज ठहर सकते हैं। वर्तमान में टर्मिनल के पास लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण चल रहा है, जिसमें जल-रेल-सड़क कनेक्टिविटी और सुरक्षित स्टोरेज की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

नेपाल से सीधे व्यापार का मार्ग खुलेगा
योजना के तहत नदियों के किनारे चिन्हित क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्र और IWT टर्मिनल बनाए जाएंगे। ये टर्मिनल न केवल स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देंगे, बल्कि नेपाल के साथ क्षेत्रीय व्यापार को भी नई गति देंगे। इससे बिहार से सीधे आयात-निर्यात संभव होगा और युवाओं के लिए हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

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