Tuesday, July 21

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल चुनावों में एससी-एसटी आरक्षण पर निर्देश देने से किया इनकार

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चुनावों में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वकीलों के लिए सीट आरक्षण के निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसा आरक्षण केवल अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में विधायी संशोधन के माध्यम से ही लागू किया जा सकता है।

 

यह निर्णय यूनिवर्सल डॉ. अंबेडकर एडवोकेट्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर आया था, जिसमें हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए अंतरिम उपाय के रूप में सीट आरक्षण की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को सक्षम अधिकारियों से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी और विधायी या प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना के लिए दरवाजे खुले रखे।

 

पीठ ने यह भी कहा कि न्यायालय केवल वही परमादेश जारी कर सकता है, जहां कोई कानूनी अधिकार मौजूद हो, और वर्तमान मामले में स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण निर्देश देना संभव नहीं था। CJI सूर्यकांत ने बार काउंसिल के चल रहे चुनावों का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि “इस स्तर पर बहुत देर हो चुकी है”।

 

तेलंगाना राज्य बार काउंसिल ने पहले ही एससी-एसटी आरक्षण की वकालत करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को अभ्यावेदन भेजा था। हालांकि, अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन नहीं होने के कारण कोई तत्काल कार्रवाई संभव नहीं है।

 

पीठ ने कहा कि समावेशिता के संवैधानिक लक्ष्य सराहनीय हैं, लेकिन भविष्य में ऐसा आरक्षण केवल विधि में संशोधन द्वारा ही प्रदान किया जा सकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतरिम राहत या दिशा-निर्देश जारी नहीं किया।

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.