Tuesday, July 21

प्रधानमंत्री को चुनौती देकर RJD बनाने वाले लालू यादव की राजनीति का अंत? तेजस्वी के नेतृत्व पर उठे सवाल

 

 

पटना: बिहार की राजनीति के दिग्गज लालू प्रसाद यादव की सक्रिय राजनीति का युग अब धीरे-धीरे समाप्त होता दिख रहा है। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लालू यादव की राजनीति से विदाई के संकेत दिए। उन्होंने तेजस्वी यादव की नई भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए और उन्हें एक तरह से ‘कठपुतली कार्यकारी अध्यक्ष’ बताया।

 

रोहिणी आचार्य ने लिखा कि लालू यादव की गौरवशाली राजनीतिक पारी का यह एक तरह से अंत है। उनका कहना है कि अगर पार्टी की वास्तविक शक्ति तेजस्वी के हाथ में नहीं रही, तो राजद में वास्तविक निर्णय किसके पास होंगे, यह सवाल बना रहेगा।

 

राजनीतिक संघर्ष और RJD का निर्माण

लालू यादव संयोग से जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, लेकिन उन्होंने अपने वरिष्ठ नेताओं और प्रधानमंत्री को चुनौती देकर 1997 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की स्थापना की। चारा घोटाला, जेल की सजा और चुनाव लड़ने की अयोग्यता जैसी बाधाओं के बावजूद उन्होंने राजद को बिहार की सबसे ताकतवर पार्टी के रूप में खड़ा किया।

 

तीन दशकों की राजनीति का अनायास अंत?

1996 से लेकर 2026 तक लालू यादव ने बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। रोहिणी आचार्य की राय में तेजस्वी यादव अगर केवल दिखावे के लिए पार्टी के नेता बने रहे, तो राजद की असली ताकत गिरोह-ए-घुसपैठ के पास चली जाएगी।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लालू यादव का राजनीतिक दबदबा अब सीमित हो सकता है और राजद की नई पीढ़ी की भूमिका इस पर निर्भर करेगी कि वे पार्टी को कितनी मजबूती से संभाल पाते हैं।

 

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